कांग्रेस के बाद अब भाजपा ने भी चुनाव आयोग का रूख कर गुजरात में आगामी राज्य सभा चुनाव में ‘नोटा’ का विकल्प हटाने की मांग की है। एक दिन पहले ही कांग्रेस ने भी इसी तरह की मांग की थी।
भाजपा ने चुनाव आयोग को सौंपे एक ज्ञापन में कहा है, ‘‘यह कहा गया कि आगामी चुनाव में ‘इनमें से कोई नहीं’ :नोटा: का इस्तेमाल राजनीतिक पार्टियों के बीच चर्चा का एक मुद्दा बन गया है और इसलिए, राज्य सभा चुनाव में नोटा के इस्तेमाल से पहले एक उपयुक्त आमराय बनाई जानी चाहिए।’’
केंद्र की सत्तारूढ़ पार्टी ने कहा कि चूंकि राज्य सभा चुनाव में मतदान में कोई गोपनीयता नहीं है इसलिए नोटा का कोई उद्देश्य नहीं है।
भाजपा ने कहा, ‘‘इसलिए, भाजपा यह मांग करती है कि गुजरात में राज्य सभा चुनाव में नोटा के विकल्प के इस्तेमाल का निर्देश तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए।’’ इस बीच, संसदीय कार्य राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि इन चुनावों के लिए पार्टियां व्हीप जारी करती हैं और ‘नोटा का विकल्प व्हीप की प्रकृति के खिलाफ जाता है। ’
उन्होंने कहा कि प्रत्यक्ष चुनाव में नोटा का इस्तेमाल सही है लेकिन राज्य सभा चुनाव में इसे वापस लेना चाहिए। इस विकल्प को खत्म किया जाना चाहिए क्योंकि यह भ्रम पैदा करता है।
गौरतलब है कि कल कांग्रेस ने आगामी राज्य सभा चुनाव में नोटा के विकल्प के इस्तेमाल के खिलाफ चुनाव आयोग का रूख कर दावा किया था कि यह संविधान और निर्वाचन कानूनों का उल्लंघन करता है।
राज्यसभा ही नहीं विधान परिषद चुनावों में भी मतपत्र पर है नोटा का विकल्पः EC
गुजरात में राज्यसभा की सीटों पर होने जा रहे चुनाव में नोटा के विकल्प पर जारी विवाद को लेकर चुनाव आयोग ने आज स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था तीन साल से लागू है। आयोग ने कहा कि साल 2013 में उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर आयोग ने जनवरी 2014 में ही राज्य सभा और फिर राज्यों की विधान परिषदों में भी मतपत्र पर नोटा का विकल्प मुहैया करा दिया था।
आयोग में कांग्रेस ने गुजरात में राज्यसभा चुनाव के मद्देनजर पहली बार मतपत्र पर नोटा का विकल्प मुहैया कराने की शिकायत दर्ज करायी है। कांग्रेस का आरोप है कि गुजरात में राज् सभा की तीन सीटों पर होने जा रहे चुनाव में उम्मीदवारों को हराने के लिये केन्द्र में सत्तारूढ़ भाजपा ने क्रास वोटिंग कराने के मकसद से यह व्यवस्था लागू की है।
इससे उपजे विवाद पर स्थिति स्पष्ट करते हुये आयोग द्वारा आज जारी आधिकारिक जानकारी में कहा गया कि सितंबर 2013 में उच्चतम न्यायालय द्वारा राज्यसभा चुनाव में मतदाताओं को नोटा का विकल्प मुहैया कराने का आदेश जारी किया गया था।
इसके अनुपालन में आयोग ने सभी राज्यों और संघ शासित क्षेत्रों के मुख्य निवार्चन अधिकारियों से 11 अक्तूबर 2013 को उनके राज्य में राज्यसभा चुनाव के मतपत्रों में नोटा विकल्प शामिल करने को कहा गया था।
इसके बाद राज्यसभा चुनाव में नोटा के विकल्प को लेकर उत्पन्न हुये भ्रम को दूर करते हुये आयोग ने 24 जनवरी 2014 को एक बार फिर सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को इस आशय का फैसला लागू करने के लिये कहा।
आयोग ने मतपत्र में नोटा विकल्प को शामिल करने इसके इस्तेमाल और मतगणना संबंधी जरूरी अनुदेश भी जारी कर दिये। इसके बाद आयोग ने नवबंर 2015 में नोटा विकल्प राज्यों के विधान परिषद चुनाव में भी मुहैया कराने की व्यवस्था लागू कर दी। आयोग ने फरवरी 2014 से अब तक हुये सभी राज्य सभा चुनाव में नोटा का विकल्प मुहैया कराने का ब्योरा जारी किया है।
साल 2014 में राज्यसभा के तीन द्विवार्षिक चुनावों, 2015 में चार और साल 2016 में दो चुनावों में नोटा विकल्प मुहैया कराया गया है। साथ ही आयोग ने इस अवधि में राज्यसभा की विभिन्न सीटों के लिये 25 उपचुनावों में भी नोटा विकल्प मुहैया कराने की बात कही है।
कांग्रेस ने राज्यसभा चुनाव से पहले विधायकों की सुरक्षा सुनिश्चत करने के लिए चुनाव आयोग से लगायी गुहार
कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज निर्वाचन आयोग से मुलाकात कर आठ अगस्त को गुजरात में होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले पार्टी के विधायकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का अनुरोध किया ताकि स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव हो सके।
पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि गुजरात के उसके विधायक सुरक्षा के कारण कर्नाटक के एक रिजार्ट में रूके हुए हैं, जहां कर्नाटक के मंत्री डी के शिवकुमार के खिलाफ आयकर जांच के नाम पर केन्द्र सरकार केन्द्रीय बलों के जरिये उसके विधायकों को डराने धमकाने का प्रयास किया।
पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल आज निवार्चन आयोग से मिला जिसमें पार्टी नेता कपिल सिब्बल, विवेक तनखा, मनीष तिवारी, राजीव शुक्ला, रणदीप सुरजेवाला और मधु गौड़ शामिल थे। पार्टी नेताओं ने आयोग को एक ज्ञापन सौंप कर इस बात को सुनिश्चित करने के लिए हस्तक्षेप करने को कहा कि उनके गुजरात विधायकों को पाला बदलने के लिए मजबूर करने के मकसद से कोई दबाव नहीं डाला जाए।
बाद में सिब्बल ने संवादादाताओं से कहा कि आज केन्द्र ने जिस प्रकार आयकर विभाग और केन्द्रीय बलों का उपयोग कर छापा डाला, उसके तरीकों को लेकर हमने ज्ञापन दिया है। इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ है। विधायकों को डराने-धमकाने का प्रयास किया गया। ऐसा इतिहास में कभी नहीं हुआ कि केन्द्रीय बल वह भी सीआरपीएफ किसी राज्य में उस राज्य सरकार की अनुमति लिए बिना गये हों।
उल्लेखनीय है कि कल भी कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग से मिलकर राज्यसभा चुनाव में नोटा विकल्प का उपयोग करने के खिलाफ एक ज्ञापन सौंपा था।