करोलबाग का अर्पित होटल अग्निकांड हो या फिल्मिस्तान का अनाजमंडी अग्निकांड, परिणाम बताते हैं कि सरकार और एजेंसियां ऐसे बड़े हादसों से सबक सीखने को तैयार नहीं रहतीं। अगर अर्पित होटल अग्निकांड से मिले सबक को ध्यान में रखा गया होता तो शायद अनाज मंडी जैसे हादसों को होने से रोका जा सकता था, या ऐसे हादसों से ज्यादा बेहतर तरीके से निबटा जा सकता था। लेकिन एजेंसियों ने घटनाओं से कोई सबक नहीं सीखा और उसका परिणाम रविवार को एक और हादसे के रुप में सामने आया जिसमें 43 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी।
जानकारी के मुताबिक अर्पित होटल अग्निकांड के बाद दिल्ली फायर सर्विस को आधुनिक बनाने की जिम्मेदारी डीएमआरसी को दी गई थी। डीएमआरसी ने इसके लिए 29 करोड़ रुपये का फंड भी जारी कर दिया था। प्रक्रिया के तहत एक स्काई लिफ्ट, चार फायर फाइटिंग रोबोट और छः ड्रोन्स की खरीद किया जाना था। स्काई लिफ्ट के लिए दस करोड़ रुपये और शेष बाकी चीजों के लिए फंड निश्चित किया गया था। फिलहाल, आज तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। अगले एक माह में यह प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद है।
होटल में 17 लोगों की मौत के बाद इस घटना की जांच के लिए एक कमेटी का गठन किया गया था। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक कमेटी ने स्पष्ट कर दिया था कि लोगों की मौत का ज्यादा बड़ा कारण आग नहीं, बल्कि धुएं से दम घुटना था। कमेटी ने सुझाव दिया था कि समय रहते सभी व्यावसायिक भवनों और अन्य बड़े भवनों में हवा-प्रकाश के लिए पर्याप्त खुली जगहें बना दी जानी चाहिए। भवन से निकासी के लिए उनके आकार के हिसाब से न्यूनतम दो या अधिक निकास द्वार होना चाहिए।
कमेटी ने करोलबाग जैसी एरिया का ड्रोन से सर्वे करवाकर आग से निबटने के लिए जरुरी कदम उठाने को कहा गया था। ड्रोन के जरिए आग से निबटने के उपायों को चेक किए जाने का भी सुझाव दिया गया था। लेकिन इस रिपोर्ट से भी कोई सीख नहीं ली गई। आज भी अनेक भवन सिर्फ एक निकास द्वार के साथ बने हैं जिसके कारण किसी दुर्घटना के समय लोगों का बाहर निकलना संभव नहीं हो पाता है। अग्निशमन विभाग समय-समय पर इस तरह की एडवाइजरी जारी करता रहता है, लेकिन फिल्मिस्तान की घटना बताती है कि इस तरह की एडवाइजरी के प्रति कोई ध्यान नहीं दिया जाता।