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रोहिंग्याओं के लिए क्यों मुश्किल हो रही है दुनिया

Tue, 12 Sep 2017 11:53 AM IST
amarujala.com- Presented By: पूजा मेहरोत्रा
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rohingyan - फोटो : rohingyan
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रोहिंग्या अल्पसंख्यकों का दुनिया के किसी भी देश, शहर या कोने में रहना खतरनाक होता जा रहा है। पिछले कुछ महीनों से म्यांमार के रखाइन में रोहिंग्या मुसलमानों के पलायन, उनके घर, गांव जलाए जाने की घटना और उन्हें म्यांमार से खदेड़े जाने की घटना ने पूरे विश्व का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है।
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लेकिन यह मामला सिर्फ रोहिंग्या मुसलमानों का नहीं बल्कि दुनिया भर में रह रहे अल्पसंख्यकों का है। दुनिया के हर कोने में आज अल्पसंख्यकों का हाल बेहाल हो चुका है। चाहें वो पाकिस्तान में रह रहे हिंदू हों या फिर बांग्लादेश में रहने वाले हिंदू। 

पढ़ें: रोहिंग्या मुसलमानों को लेकर भारत का रुख नियमों के खिलाफ, UN ने कहा- नहीं भेज सकते वापस

रोहिंग्या भी म्यांमार में अल्पसंख्यक हैं और वे बौद्ध बहुल क्षेत्र रखाइन में रहते हैं। रखाइन बांग्लादेश की सीमा से लगा हुआ प्रांत है। म्यांमार में रोहिंग्या की आबादी लगभग 10 लाख है। जबकि संयुक्त राष्ट्र के आंकड़े के मुताबिक करीब इतने ही रोहिंग्या बांग्लादेश, भारत, पाकिस्तान के साथ एशिया के कई देशों में शरण लिए हुए हैं। 
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पढ़ें: म्यांमार हिंसा: आपको भी झंकझोर देगी रोहिंग्या मुसलमानों की दर्दनाक दास्तां

म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ आग तो 2012 में सुलगनी शुरू हो गई थी जब रोहिंग्या पर आरोप लगा था कि उन्होंने कुछ सुरक्षाकर्मियों की हत्या कर दी है। और फिर बौद्धों और मुसलमानों में दंगे भड़कने शुरू हो गए लेकिन मामला तब और बढ़ गया जब 25 अगस्त को रोहिंग्या मुसलमानों ने दर्जनों पुलिस वालों पर हमला कर दिया। 
 
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रोहिंग्या को शरण न देने की वजह है देश की सुरक्षा

Rohingya
लेकिन अगर बात हम विश्वभर में अल्पसंख्यकों की करें तो सिर्फ रोहिंग्या नहीं बल्कि जिस भी देश में जो अल्पसंख्यक हैं शक्ति संपन्न वर्ग उनपर अत्याचार करता रहा है। पिछले साल बांग्लादेश और पाकिस्तान से भी हिंदुओं को दी जा रही विभिन्न तरह की यातनाओं की खबरें आईं थी। आज भी कई पाकिस्तानी हिंदू भारत में शरणार्थी बने हुए हैं।

पाकिस्तान में फिलहाल 17 करोड़ के लगभग मुसलमान हैं और हिंदुओं की आबादी महज 27 लाख  है। समय समय पर हिंदुओं के साथ हो रहे अत्याचारों जैसे हिंदू व्यापारियों का अपहरण, हिंदू महिलाओं का धर्म परिवर्तन कर शादी, दुकानों में लूटपाट, संपत्तियों पर जबरन कब्जा से लेकर कई खबरें आती रही हैं।

जबकि बांग्लादेश में भी कई हिंदुओं के घर जला दिए गए थे। वहीं मंदिर तोड़े जाने की भी कई घटनाएं हुईं थी।  नवंबर 2016 में मंदिर जलाए जाने से लेकर घरों में आग लगाए जाने तक की घटनाएं सामने आईं थीं। बता दें कि बांग्लादेश की कुल जनसंख्या करीब 16 करोड़ है जिसमें 1.70 करोड़ हिंदू हैं।

वहां हिंदू के हालात भी खराब बने हुए हैं। पिछले वर्षों में बांग्लादेश छोड़ने वाले हिंदुओं की संख्या दिनों दिन बढ़ रही है। 1951 में बांग्लादेश की जनसंख्या का 22 फीसदी हिंदू थे जो 1974 में घटकर 14 फीसदी ही रह गए और 2011 तक ये आंकड़ा महज 8 फीसदी तक रह गया है। लेकिन जब बात रोहिंग्या की करें तो कोई भी देश और समुदाय उन्हें शरण देने को तैयार नहीं है और इसकी बड़ी वजह देश की सुरक्षा है। 



 
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