ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल को अधिक शक्तियां इसलिए दी गई हैं क्योंकि भाजपा को पता है कि वह वहां सरकार नहीं बना पाएगी।
हैदराबाद से लोकसभा सांसद ने ओवैसी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट में कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 के तहत जारी नियमों में संशोधन कर उपराज्यपाल को दी गई शक्तियों को लेकर एनडीए सरकार पर हमला किया। उन्होंने कहा कि ये संशोधन जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन के तहत निर्वाचित सरकार को सौंपे गए विषयों पर अतिक्रमण करते हैं। इस आशंका में कि चुनाव के बाद (यदि चुनाव होते हैं) भाजपा सरकार नहीं बना पाएगी, करीब सारी शक्तियां एलजी को तोहफे में दे दी गई हैं। निर्वाचित सरकार लंगड़ी हो जाएगी और उसकी तैनाती, सुरक्षा आदि में कोई भूमिका नहीं होगी। यह काफी हद तक पुडुचेरी जैसा होगा। उन्होंने कहा कि जेकेएएस के अधिकारियों को प्रशासनिक सचिव के रूप में तभी तैनात किया जा सकता है जब एलजी उन्हें सुपर सीएम बनाएं।
लोकसभा में शपथ ग्रहण समारोह के दौरान हुआ था विवाद
लोकसभा चुनाव के बाद सांसदों के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान तेलंगाना के हैदराबाद से एक बार फिर चुनकर सांसद बने असदुद्दीन ओवैसी ने नए विवाद को जन्म दिया था। दरअसल, ओवैसी ने शपथ लेने के आखिर में फलस्तीन के समर्थन में नारा लगाया। इसे लेकर सत्तापक्ष के सांसदों ने विरोध दर्ज कराया। बाद में सभापति ने इसे रिकॉर्ड से हटाने का निर्देश दिया। इस घटना के बाद से हिंदू संगठनों ने ओवैसी पर कार्रवाई की मांग की थी।
सदन में ओवैसी के नारा लगाने के बाद प्रोटेम स्पीकर भर्तृहरि महताब ने कहा कि केवल शपथ का मूल पाठ ही रिकॉर्ड में दर्ज किया जा रहा है। महताब ने कहा, ‘‘मैंने पहले भी कहा है कि कृपया शपथ के मूलपाठ के अलावा किसी और चीज का जिक्र करने से बचें। इसका पालन किया जाना चाहिए।’’