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Indus Water Row: 'एक बूंद भी नहीं..', कैसे सिंधु नदी के पानी को पाकिस्तान जाने से रोकने की योजना बना रहा भारत?

Sat, 26 Apr 2025 08:29 AM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

आर्थिक मोर्चे पर पहले ही बुरी तरह से घिरा पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ भारत की कार्रवाई के चलते अलग-थलग पड़ सकता है। सिंधु जल संधि के निलंबन से पाकिस्तान परेशान है। उसके हालिया बयान इस ओर इशारा भी कर रहे हैं। इसे लेकर भारत ने भी अपनी रणनीति मजबूत करना शुरू कर दिया है।
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सिंधु जल संधि - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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सिंधु जल संधि को निलंबित करने की अहमियत पर जोर देते हुए केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने कहा है कि भारत यह सुनिश्चित करेगा कि सिंधु नदी के पानी की एक भी बूंद पाकिस्तान न जाए। दरअसल, पाटिल ने शुक्रवार को गृह मंत्री अमित शाह के आवास पर एक बैठक के बाद एक पोस्ट में यह बात कही। बैठक में शीर्ष अधिकारी भी शामिल हुए थे। पाटिल ने एक्स पर हिंदी में लिखा, 'सिंधु जल संधि पर मोदी सरकार द्वारा लिया गया ऐतिहासिक निर्णय पूरी तरह से उचित और राष्ट्रीय हित में है। हम ख्याल रखेंगे की पाकिस्तान में सिंधु नदी का एक बूंद पानी भी नहीं जाए ।'

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इससे पहले बुधवार को भारत ने 1960 की सिंधु जल संधि को स्थगित करने की घोषणा की थी। यह जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए नृशंस आतंकी हमले के बाद उठाए गए कदमों का हिस्सा है। इस हमले में 25 पर्यटक और एक स्थानीय व्यक्ति मारा गया था। इसके बाद जल शक्ति मंत्रालय ने गुरुवार को पाकिस्तान के जल संसाधन मंत्रालय के सचिव सैयद अली मुर्तुजा को पत्र भेजकर इस फैसले की जानकारी दी। मंत्रालय ने पत्र में कहा कि किसी संधि का सम्मान सद्भावनापूर्वक करना संधि का मूलभूत हिस्सा है। इसके बजाय पाकिस्तान की ओर से भारतीय केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर को निशाना बनाकर सीमा पार से आतंकवाद जारी रखा है।

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सिंधु जल संधि - फोटो : अमर उजाला (फाइल)
इस तरह से बनाई जा रही योजना 
शीर्ष अधिकारियों ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आवास पर हुई बैठक में भारत के अगले कदमों के लिए एक विस्तृत योजना पर चर्चा की गई। इस दौरान यह निर्णय लिया गया कि संधि के निलंबन का कार्यान्वयन तुरंत शुरू होगा। एक अधिकारी ने कहा, 'कई दीर्घकालिक योजनाएं विचाराधीन हैं, लेकिन प्राथमिकता ऐसी योजना है, जो तत्काल और मध्यम अवधि के भविष्य के लिए खाका तैयार कर सके।' 

विश्व बैंक द्वारा मध्यस्थता की गई सिंधु जल संधि के तहत भारत को सिंधु प्रणाली की तीन पूर्वी नदियों रावी, ब्यास और सतलुज पर पूरा अधिकार है, जबकि पाकिस्तान को तीन पश्चिमी नदियों सिंधु, झेलम और चिनाब से लगभग 135 मिलियन एकड़ फीट (MAF) पानी मिलता है, जो सभी भारत से देश में बहती हैं। 

अल्पावधि में विचाराधीन विकल्पों में से केंद्र सिंधु, झेलम और चिनाब पर मौजूदा बांधों से गाद निकालने और जलाशय की क्षमता बढ़ाने पर विचार कर रहा है, जिससे पाकिस्तान में बहने वाले पानी में कमी आएगी। पाकिस्तान भारत की दो जलविद्युत परियोजनाओं झेलम की एक सहायक नदी पर किशनगंगा और चिनाब की एक सहायक नदी पर निर्माणाधीन रतले पर आपत्ति जता रहा है। संधि के निलंबन से भारत को पाकिस्तान की आपत्तियों को अनदेखा करने का मौका मिलेगा। दीर्घावधि में इन नदियों पर नए बांध और बुनियादी ढांचे का निर्माण भी कुछ ऐसा है, जिस पर विचार किया जा रहा है।

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Indus Water treaty - फोटो : Amar Ujala
कानूनी जवाब भी तैयार किया जा रहा
अधिकारियों ने बताया कि विश्व बैंक या किसी अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्था की ओर से कोई दबाव पड़ने की स्थिति में कानूनी जवाब भी तैयार किया जा रहा है। कूटनीतिक प्रयास भी जारी रहेंगे, ताकि अन्य देशों को पता चले कि भारत ने यह कदम क्यों उठाया। एक अधिकारी ने कहा कि सरकार का इरादा यह भी सुनिश्चित करना है कि भारत में लोगों को इसकी वजह से कोई असुविधा न हो या बहुत कम हो। जल शक्ति, गृह और विदेश मंत्रालय इस पर समन्वित तरीके से काम कर रहे हैं।

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पहलगाम आतंकी हमला - फोटो : Amar Ujala
पाकिस्तान की छटपटाहट से मिल रहे संकेत
पाकिस्तान ने पहले ही संकेत दे दिया है कि वह संधि के निलंबन से परेशान है। पाकिस्तान की सरकार ने गुरुवार को एक बयान में कहा था, 'सिंधु जल संधि के अनुसार पाकिस्तान के पानी के प्रवाह को रोकने या मोड़ने का कोई भी प्रयास... युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा और राष्ट्रीय शक्ति के पूरे स्पेक्ट्रम में पूरी ताकत से जवाब दिया जाएगा।'

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