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अल निनो नहीं उत्तरी अटलांटिक हवाओं के कारण सौ साल में सूखे की आधी घटनाएं

Sat, 12 Dec 2020 03:21 AM IST
Kuldeep Singh एजेंसी, बंगलुरू
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सूखा - सांकेतिक तस्वीर
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बीते सौ वर्षों में देश में सूखा पड़ने की आधी प्राकृतिक त्रासदी का कारण उत्तरी अटलांटिक से उठने वाली हवाएं हो सकती हैं। भारतीय विज्ञान संस्थान और वायुमंडलीय एवं महासागरीय विज्ञान केंद्र (सीएओएस) ने एक शोध में यह दावा किया है। आमतौर पर गर्मियों के बाद पर्याप्त मानसून नहीं आने पर देश के कई हिस्सों में सूखा पड़ता है और ऐसा  माना जाता है कि इसका कारण अल निनो है लेकिन साइंस जर्नल में छपे इस शोध के बाद यह धारणा बदलेगी।

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23 में से 10 सूखे तब पड़े जब अल निनो नहीं था
शोध के मुताबिक बीते सौ वर्षों में भारत में सूखा पड़ने की 23 बड़ी घटनाओं में से दस तब हुई, जिस वर्ष अल निनो नहीं हुआ। ऐसे में इन प्राकृतिक आपदाओं का क्या कारण रहा होगा। वैज्ञानिकों ने अपने शोध में पाया कि ये सूखे अगस्त के अंत में अचानक आई बारिश में गिरावट के कारण पड़े।

ये गिरावट उत्तरी अटलांटिक महासागर के मध्य क्षेत्र में एक वायुमंडलीय गड़बड़ी से जुड़ी थी। जिससे उपमहाद्वीप के ऊपर झपटने वाले वायुमंडलीय धाराओं के पैटर्न बनते थे और मानसून हल्का पड़ जाता था।
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सीएओएस के सहायक प्रोफेसर वी वेणुगोपाल ने कहा, 1980 से पहले लोगों ने कभी इन सूखों को व्यापक रूप से समझने की कोशिश नहीं की। सब बस मान बैठे कि ऐसा अल निनो के कारण होता आ रहा था। शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने अल निनो और गैर अल निनोे वाले सूखों के दौरान जून और सितंबर के बीच दैनिक बारिश का बारीकी से अध्ययन किया।

उन्होंने पाया कि अल लियो के दौरान बारिश का एक अलग पैटर्न था। इसमें मई में बारिश कम होती है। जबकि गैर अल निनो वाले सूखों के दौरान एक अलग पैटर्न था। इसमें शुरुआती मानसून में तो बारिश होती है लेकिन जुलाई के मध्य और अगस्त में बारिश बिल्कुल नहीं होती। ऐसा उत्तरी अटलांटिक महासागर पर उठने वाली हवाओं कारण हुआ। इसके बाद वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे कि इन सूखों का कारण उत्तरी अटलांटिक क्षेत्र की हवाएं हो सकती हैं।

क्या है अल निनो
विभिन्न अध्ययनों की मानें तो अल निनो, एक आवर्ती जलवायु घटना है जिसके दौरान असामान्य रूप से गर्म भूमध्यवर्ती प्रशांत जल भारतीय उपमहाद्वीप के नमी से भरे बादलों को खींचते हैं। जिसके चलते मानसून सामान्य से बहुत कम होता है और देश के कई इलाकों में सूखा पड़ता है।

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