बलूचिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर में मानवाधिकारों के उल्लंघन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से पाकिस्तान से जवाब की मांग किए जाने के बाद बलोच राजनीतिक पार्टियों ने अपनी आवाज बुलंद कर दी है। बलोच रिपब्लिकन पार्टी के ब्रह्मदघ बुगती ने बलूचिस्तान में पाकिस्तान की शरीफ फौज की हरकतों का काला चिट्ठा खोला है। बुगती ने कहा कि ऐसा कोई भी दिन नहीं जाता जब यहां लोगों को अगवा न किया जाता हो और शव न मिलते हो।
बुगती ने कहा कि हाल के वर्षों में पाकिस्तानी फौज ने ऐसे ऑपरेशनों की संख्या बढ़ा दी है और यह लगातार चल रहा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान आर्मी का काम चीनी कंपनियों को बलूचिस्तान लाना और यहां के संसाधनों को लूटना है। इसका विरोध करने वाले लोगों को प्रताड़ित किया जाता है। लिहाजा लोग बलूचिस्तान छोड़कर जाने लगे हैं।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का मुख्य फोकस डेरा बुगती और ग्वादर (बलूचिस्तान) पर है। यहां पाकिस्तान आर्मी कैंट बना रहा है ताकि जनता की प्रतिक्रिया को रोका जा सके।
बलोच रिपब्लिकन पार्टी के संस्थापक ब्रह्मदघ बुगती भारत-पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय बातचीत पर समितियों के गठन पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी समितियों का मकसद सिर्फ मीडिया की ओर से उठाए जा रहे सवालों से बचना होता है।
बुगती ने कहा कि पहले पाकिस्तानी फौज लोगों को अगवा करती और प्रताड़ित कर छोड़ देती, लेकिन अब अगवा करती है और लाशें फेंक जाती है।
बलोच के लिए चीन बड़ा खतरा
बलूचिस्तान
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दूसरी ओर यूरोपियन यूनियन और संयुक्त राष्ट्र में बलूचिस्तान के प्रतिनिधि मेहरान मर्री ने कहा कि दशकों से पाकिस्तानी फौज का ऑपरेशन चल रहा है। हालांकि इसकी तीव्रता समय दर समय बदलती रहती है।
मारी का कहना है कि 'नवाज शरीफ के प्रधानमंत्री बनने के बाद बलोच में पाकिस्तान आर्मी की गतिविधियां बढ़ गई हैं। हर रोज युवाओं को अगवा किया जा रहा है और अब लोग इसके खिलाफ सड़कों पर उतरने लगे हैं। पाकिस्तान उन लोगों से डरा रहता है, जो यूएन को मानवाधिकार उल्लंघन और जनसंहार की घटनाओं से वाकिफ कराते हैं।'
उन्होंने कहा कि बलोच राष्ट्रवाद और संसाधनों के लिए चीन सबसे बड़ा खतरा है जितना कि पाकिस्तान। बलोच जनता मिलिट्री जनरल्स और लीडरों से लड़ रही है। मिलिट्री से बातचीत असंभव है और यह रास्ता आगे नहीं जाता।
मारी ने कहा कि चीन बहुत तेजी से बलूचिस्तान में अपनी पकड़ बढ़ा रहा है। इसलिए हम इंटरनेशनल कम्युनिटी से दखल देने की अपील कर रहे हैं।
भारत से हस्तक्षेप की मांग
narendra modi
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गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान का बलोच नेताओं ने स्वागत किया है और भारत से हस्तक्षेप की मांग की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते शुक्रवार को हुई सर्वदलीय बैठक में कहा था कि पाकिस्तान को पीओके और बलूचिस्तान में मानवाधिकारों के उल्लंघन पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को जवाब देना होगा।
वर्ल्ड बलूच वूमेंस फोरम की प्रमुख नाइला कादरी ने पीओके और बलूचिस्तान के लोगों के समर्थन करने के लिए शुक्रिया अदा किया था। उन्होंने कहा कि भारतीय प्रधानमंत्री ने गिलगित-बाल्टिस्तान और पीओके के लोगों की दिक्कत समझने की कोशिश की। उम्मीद है कि पीएम सितंबर में होने वाली संयुक्त राष्ट्र की बैठक में यह मसला जरूर उठाएंगे।