उत्तर रेलवे ने संसद में चार कैंटीन को चलाने के लिए लोकसभा सचिवालय से 16.43 करोड़ रुपये की मांग की है। यह खुलासा एक आरटीआई के माध्यम से हुआ है। यह राशि ‘सब्सिडी दावा और रखरखाव की लागत’ के रूप में मांगी गई है। संसद में 2017-18 के दौरान खाने की कीमतें काफी कम रहीं।
आरटीआई कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ को सूचना के अधिकार के तहत संसद भवन, पार्लियामेंट हाउस एनेक्सी, पार्लियामेंट हाउस रिसेप्शन और पार्लियामेंट हाउस लाइब्रेरी बिल्डिंग में कैटरिंग यूनिट चलाने के लिए उत्तर रेलवे द्वारा भेजे गए डिमांड नोट की एक प्रति प्रदान की गई।
जुलाई 2018 में भेजी गई इस प्रति के माध्यम से पता चलता है कि रेलवे ने 2017-18 के लिए ‘सब्सिडी क्लेम और स्थापना लागत’ के रूप में 16,43,90,598 रुपये की मांग की है। 16 जनवरी, 2019 की स्थिति तक रेलवे को कोई भी भुगतान प्राप्त नहीं हुआ है।
संसद की कैंटीन में खाद्य पदार्थों की कम कीमतों का मुद्दा पहले से ही विवादास्पद रहा है। 31 दिसंबर, 2015 को, लोकसभा सचिवालय ने सूचित किया था कि यह कैंटीन 1 जनवरी, 2016 से ‘नो-प्रॉफिट, नो-लॉस’ के आधार पर काम करेंगी और दरों में उसी अनुसार इजाफा किया जाएगा।
दिसंबर 2018 में गौड़ को मिले एक आरटीआई जवाब के अनुसार, संसद की कैंटीन में एक चपाती की कीमत दो रुपये, मिश्रित दाल पांच रुपये, चावल 7 रुपये, खीर और मसाला दोसा 18 रुपये और चिकन करी 50 रुपये है।