Rajya Sabha: सरकार ने बताया कि 176 विमानों में फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर और कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर नहीं हैं, क्योंकि ये नियम केवल 1 जनवरी 2016 के बाद उड़ान योग्य प्रमाणपत्र पाने वाले विमानों पर लागू होते हैं। झारखंड में दुर्घटनाग्रस्त 40 साल पुराने बीचक्राफ्ट सी90A में भी ये रिकॉर्डर नहीं थे।
सरकार ने सोमवार को राज्यसभा में बताया कि 176 विमानों में फ्लाइट डाटा रिकॉर्डर या कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर नहीं हैं। नियमों के अनुसार, जिन विमानों का टेक-ऑफ वजन 5,700 किलोग्राम से कम होता है, उनमें कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर लगाना अनिवार्य है, लेकिन केवल उन्हीं विमानों के लिए जिनको 1 जनवरी 2016 या उसके बाद उड़ान योग्य प्रमाणपत्र (एयरवर्थनेस सर्टिफिकेट) मिला हो।
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विमानन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने लिखित जवाब में कहा कि 1 जनवरी 2016 से पहले कुल 2,263 विमानों को पंजीकृत किया गया। उन्हें उड़ान योग्य प्रमाणपत्र जारी किया गया। उन्होंने बताया कि नॉन-शेड्यूल्ड ऑपरेटर परमिट और सामान्य विमानन ऑपरेटर्स के 176 विमान ऐसे हैं, जिनमें फ्लाइट डाटा रिकॉर्डर या कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर नहीं लगे हैं।
दुर्घटनाग्रस्त सी90ए विमान में नहीं था फ्लाइट डाटा रिकॉर्डर
मंत्री से पूछा गया था कि क्या सरकार के पास ऐसे विमानों का आंकड़ा है, जिनमें कॉकपिट वॉइस और फ्लाइट डाटा रिकॉर्डर नहीं हैं। पिछले महीने झारखंड में दुर्घटनाग्रस्त हुए लगभग 40 साल पुराने बीचक्राफ्ट सी90ए विमान में भी कॉकपिट वॉइस और उड़ान डाटा रिकॉर्डर नहीं थे। जब इस विमान को 1987 में उड़ान योग्य प्रमाणपत्र मिला था, तब विमानों में कॉकपिट वॉइस और उड़ान डाटा रिकॉर्डर होना अनिवार्य नहीं था।
क्या नियम उल्लंघन पर कार्रवाई हुई?
मोहोल ने यह भी बताया कि पिछले पांच वर्षों में एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस के एक-एक विमान को उड़ान योग्य प्रमाणपत्र के नियमों के उल्लंघन में पकड़ा गया। जांच के बाद विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने कार्रवाई की। इसमें जुड़ी संस्थाओं पर जुर्माना लगाया गया, जिम्मेदार पदाधिकारी की अनुमति रद्द की गई और विमान रखरखाव इंजीनियर का लाइसेंस तीन महीने के लिए निलंबित किया गया। मंत्री ने एक अन्य लिखित जवाब में बताया कि पिछले तीन वर्षों में भारतीय एयरलाइनों में कुल 1,244 तकनीकी खामियां दर्ज की गईं। आंकड़ों के अनुसार, 2025 में 353, 2024 में 421 और 2023 में 470 तकनीकी खामियां दर्ज हुईं।