मुंबई की एक विशेष अदालत ने गुरुवार को एक मनी लॉन्ड्रिंग मामले में इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन के संस्थापक जाकिर नाइक के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया है। प्रवर्तन निदेशालय की ओर से दायर एक याचिका पर कोर्ट ने जाकिर के खिलाफ वारंट जारी किया है। बता दें कि ईडी ने जाकिर नाईक को उसके समक्ष पेश होने के लिए चार समन जारी किए थे लेकिन उसने किसी का भी जवाब नहीं दिया।
एनबीडब्लू ने विदेश मंत्रालय को इसके निष्पादन के लिए संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) को भेजा है। आपको बता दें कि कोर्ट के फैसला देने के पहले जाकिर के वकील ने अपनी दलील प्रस्तुत की थी, जिसका प्रवर्तन निदेशालय ने विरोध किया।
इससे पहले ईडी ने मंगलवार को विशेष अदालत में याचिका दायर की थी और एनबीडब्ल्यू ने कहा कि नाइक जांच प्रक्रिया में सहयोग देने में नाकाम रहे हैं। इसके अलावा ईडी के वकील हितेन वेनेगांवकर ने कहा कि कई सम्मन जारी करने के बावजूद नाईक जांच एजेंसी के सामने पेश नहीं हुए।
वेनेगांवकर ने दावा किया कि जाकिर ईडी के सामने पेश होने के बजाय नियमों और शर्तों को ताक पर रखने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने पहले ही सम्मन का पालन करने के लिए और अधिक समय की मांगा था। जिसके बाद एजेंसी ने उनसे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये बयान दर्ज करने के लिए कहा था।
ईडी ने जाकिर के एनजीओ आईआरएफ को विदेशों से प्राप्त 60 करोड़ रुपये के फंड में गफलत होने का आरोप लगाकर इसकी जांच कराने की मांग की थी। बता दें कि इसके पहले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए नाईक के इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन (आईआरएफ) और अन्य संस्थाओं की 18.37 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की थी।