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UCC: 'देश में यूसीसी लागू करना काफी मुश्किल भरा काम', अमर्त्य सेन ने हिंदू राष्ट्र की थ्योरी से बताया संबंध

Thu, 06 Jul 2023 07:00 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन एक जाने-माने अर्थशास्त्री भी हैं। सेन को भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया है। उनका कहना है कि भारत में अधिक भिन्नताएं हैं। भारत में कई सारे धर्म हैं। भारत में कई रीति-रिवाज है। हमें इसे हटाना चाहिए और हमें उन मतभेदों को दूर करके एकजुट करने की जरूरत है।
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प्रख्यात अर्थशास्त्री प्रोफेसर अमृत्य सेन (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
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विस्तार
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देश में इन दिनों समान नागरिक संहिता पर काफी विवाद चल रहा है। इसी कड़ी में नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन का कहना है कि भारत में सामान्य नागरिक संहिता लागू करना काफी मुश्किल भरा काम है। इसके लिए काफी मेहनत चाहिए। यूसीसी हिंदू राष्ट्र की थ्योरी से मेल खाता है।

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जल्द से जल्द लागू करें
नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन एक जाने-माने अर्थशास्त्री भी हैं। सेन को भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया है। उन्होंने कहा कि मैंने अखबार में पढ़ा, जिसमें लिखा था UCC में अब और देरी नहीं करनी चाहिए, ऐसे मूर्खतापूर्ण बात कहां से आई? UCC में कुछ नियम हैं, वे इस तरह इसे कैसे लागू कर सकते हैं? इससे किसका फायदा होगा? वे जिस तरह देश चलाना चाहते हैं वह गलत है। हम कई सालों से यूसीसी के बिना भी रहते आ रहे थे। भविष्य में भी इसके बिना रह सकते हैं। हिंदू राष्ट्र और यूसीसी के बीच समानता के सवाल पर उन्होंने कहा कि हां, हिंदू राष्ट्र का यूसीसी से संबंध है। लेकिन प्रगति के लिए सिर्फ हिंदू राष्ट्र ही एकमात्र रास्ता नहीं है।

जानिए क्या है यूसीसी
यूनिफॉर्म सिविल कोड का अर्थ होता है भारत में रहने वाले हर नागरिक के लिए एक समान कानून होना, चाहे वह किसी भी धर्म या जाति का क्यों न हो। समान नागरिक संहिता में शादी, तलाक और जमीन-जायदाद के बंटवारे में सभी धर्मों के लिए एक ही कानून लागू होगा। इसका अर्थ है एक निष्पक्ष कानून, जिसका किसी धर्म से कोई ताल्लुक नहीं है।
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आने वाले संसदीय सत्र में पेश हो सकता है यूसीसी
यूसीसी भाजपा के एजेंडे में लंबे समय से था। विधि आयोग ने 14 जून को उस प्रस्ताव के बारे में 30 दिनों के भीतर जनता और मान्यता प्राप्त धार्मिक संगठनों से  विचार मांगकर यूसीसी पर अपनी कवायद फिर से शुरू कर दी थी। यह बिल आने वाले संसदीय सत्र में पेश हो सकता है। इस मुद्दे को हवा जब लगी तब 27 जून को, पीएम मोदी ने भोपाल में यूसीसी के बारे में बात करते हुए कहा कि देश दो कानूनों पर नहीं चल सकता है और समान नागरिक संहिता संविधान का हिस्सा है। भाजपा के 2019 के लोकसभा चुनाव घोषणापत्र में, पार्टी ने सत्ता में आने पर यूसीसी को लागू करने का वादा किया था।

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