तीन तलाक और मुस्लिमों की व्यक्तिगत कानूनों के तहत बहुविवाह सहित संवैधानिक महत्व के तीन मामलों के लिए पहली बार 15 जज गर्मी की छुट्टियों में सुनवाई करेंगे। इन तीनों मामलों पर संविधान पीठ 11 मई से सुनवाई करेगी।
चीफ जस्टिस न्यायमूर्ति जेएस खेहर ने गुरुवार को बताया कि गर्मी की छुट्टियों में तीन अलग-अलग संविधान पीठ के गठन को मंजूरी दे दी गई है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर इन मामलों की सुनवाई अब न हो सकी तो वर्षों तक इन मसलों का निपटारा नहीं हो पाएगा।
बताते चलें कि गर्मी की छुट्टियों में एक दो सदस्यीय पीठ के बैठने का चलन रहा है लेकिन इस बार सुप्रीम कोर्ट के 28 जजों में से 15 जज सुनवाई करेंगे। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने 27 मार्च को शीर्ष अदालत से कहा था कि इन प्रथाओं को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई नहीं होनी चाहिए क्योंकि ये मसले न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र से बाहर के हैं।
चीफ जस्टिस और न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने बताया कि इस बार ग्रीष्मावकाश के दौरान मुस्लिम समुदाय में तीन तलाक, निकाह हलाला व बहुविवाह की वैधता, व्हाट्स ऐप व फेसबुक यूजर्स के लिए निजता के अधिकार और भारत में जन्मे अवैध प्रवासियों के बच्चों को भारतीय नागरिकता देने के मसले पर पांच जजों वाली तीन पीठ सुनवाई करेगी।
उन्होंने कहा, ‘ये सभी महत्वपूर्ण मामले हैं। अगर अलग-अलग संविधान पीठ इन मामलों पर सुनवाई नहीं करेगी तो इनका निपटारा वर्षों में नहीं हो पाएगा।’ उन्होंने वकीलों से कहा कि अगर ऐसा नहीं होगा तो आप हमें दोष नहीं दीजिएगा।