गुजरात में केवल छह दिन में बना कोविड-19 अस्पताल (फाइल फोटो)
भारत ने अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता संबंधी अमेरिकी आयोग (यूएससीआईआरएफ) के उस दावे को खारिज किया है जिसमें कहा गया था कि अहमदाबाद के अस्पताल में कोविड-19 के मरीजों को धार्मिक पहचान के आधार पर अलग अलग रखा गया।
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता संबंधी अमेरिकी आयोग (यूएससीआईआरएफ) भारत में कोविड-19 से निपटने के लिए पालन किए जाने वाले पेशेवर मेडिकल प्रोटोकॉल पर गुमराह करने वाली रिपोर्टों को फैला रहा है।
विदेश मंत्रालय ने अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता संबंधी अमेरिकी आयोग (यूएससीआईआरएफ) की टिप्पणी पर कहा, अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में धार्मिक आधार पर कोविड-19 के मरीजों को अलग-अलग नहीं किया गया।
अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता संबंधी अमेरिकी आयोग (यूएससीआईआरएफ) को कोरोना वायरस महामारी से निपटने के भारत के राष्ट्रीय लक्ष्य को धार्मिक रंग देना बंद करना चाहिए।
दूसरी ओर अहमदाबाद सिविल अस्पताल के सर्जन प्रोफेसर जीएच राठौड़ का कहना है कि कुछ दैनिक समाचार पत्रों में छपी खबर ने मेरे बयान को गलत तरह से समझा है कि "हमने मुसलमानों और हिंदुओं के लिए अलग वार्ड बनाए हैं।" मेरे नाम की यह रिपोर्ट झूठी और निराधार है और मैं इसकी निंदा करता हूं।