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पश्चिम बंगाल में सीएम ममता बनर्जी का भी कोई जवाब नहीं, शुरू किया गांव-गांव का दौरा

Thu, 26 Nov 2020 06:18 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • भाजपा की गाडियों के काफिले के जवाब में अकेले समान्य गाड़ी में जाती हैं ममता
  • प्रधानमंत्री मोदी, गृहमंत्री शाह और भाजपा अध्यक्ष नड्डा को चुनौती देने की तैयारी
  • अगले तीन महीने की जटिलताओं का है ममता बनर्जी को अंदाजा
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सीएम ममता बनर्जी-राज्यपाल जगदीप धनखड़ - फोटो : ANI (File)
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विस्तार
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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का भी कोई जवाब नहीं है। ममता बनर्जी ने लोगों से संपर्क बढ़ा दिया है। वह लगातार लोगों के हितों से जुड़ी भाषा बोल रही हैं और तृणमूल कांग्रेस के जिला अध्यक्षों को गांव-गाव जाकर लोगों, अधिकारियों से तालमेल बनाने को कहा है। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख के सचिवालय के सूत्र का कहना है कि भाजपा चाहे जितनी कोशिश कर ले, 2021 में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव के बाद सरकार ममता बनर्जी के ही नेतृत्व में बनेगी। ममता बनर्जी को भी राज्य के करीब दो लाख दुर्गापूजा क्लबों के सहारे पूरे बंगाल में मतदाताओं तक पहुंच जाने का पूरा भरोसा है।

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शांतनु बनर्जी तृणमूल कांग्रेस से पिछले 20 साल से जुड़े हैं। शांतनु का कहना है कि ममता बनर्जी कारों के काफिले में नहीं चलतीं। वह किसी भी छोटी सी कार से पश्चिम बंगाल के किसी भी गांव में पहुंचकर खाट खींचकर बैठ जाती हैं। वहीं भाजपा के प्रदेश के भी नेता बड़ी-बड़ी कारों के लंबे काफिले में चलते हैं। यह पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों के गांव-गांव के मतदाताओं को पता है। यही ममता की ताकत है।

'मोदी सरकार सत्ता के लिए भेदभाव कर रही है'

सुदीप घोष कहते हैं कि बंगाल में सांप्रदायिक राजनीति के लिए अभी जगह कम है। भाजपा बंगाल में सांप्रदायिक राजनीति ही कर रही है। इसलिए मुझे लग रहा है कि विधानसभा चुनाव में भी वह इसी मॉडल के साथ उतरेंगी। दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र रहे सुदीप का कहना है कि पश्चिम बंगाल में करीब 34 फीसदी अल्पसंख्यक मतदाता हैं। भाजपा की थोड़ी बहुत ताकत उत्तरी बंगाल में दिखाई देती है, लेकिन इसके अलावा अन्य क्षेत्र में उसे अभी अपनी जगह बनानी है।

सबसे बड़ी बात यह है कि गांव-गांव के बंगाली को पता है कि केन्द्र की मोदी सरकार राज्य में सत्ता पाने के लिए यहां के लोगों के साथ भेद-भाव कर रही है। पश्चिम बंगाल को विकास के मद में वित्तीय संसाधन बहुत कम आवंटित होते हैं। इसके जवाब में पश्चिम बंगाल में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष कहते हैं कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी केन्द्रीय सहायता लेती ही नहीं। वह लौटा देती हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल में आयुष्मान भारत की योजना भी नहीं लागू होने दी।

ममता के ये दांव भाजपा को पड़ेंगे भारी

पूरे देश में आलू के भाव आसमान छू रहे हैं। 50-60 रुपये प्रति किलो की दर से खुदरा आलू मिल रहा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसका दोष केन्द्र सरकार पर मढ़ना शुरू कर दिया है। इससे पहले प्याज के बढ़े दाम के लिए भी केन्द्र को जिम्मेदार ठहराया था। भाजपा की हिन्दुत्व की राजनीति को भांपते हुए चुनाव प्रचार अभियान के रणनीतिकार प्रशांत किशोर की सलाह लेकर ममता बनर्जी ने पूरे बंगाल में दुर्गा पूजा समितियों को कोविड-19 संक्रमण के बाबत चंदा न मांगने की सलाह दी। दुर्गा पूजन के लिए 50 हजार रुपये प्रति समिति के हिसाब से वितरित करा दिए।

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विवेक सान्याल बताते हैं कि ममता बनर्जी के इस प्रयास की चर्चा पूरे बंगाल में है। सान्याल का कहना है कि पश्चिम बंगाल में दो लाख के करीब क्लब हैं। इन क्लबों से वहां के लोग जुड़े हैं और प्रत्येक क्लब को राज्य सरकार से अनुदान मिलता है। इसके अलावा हर गांव में अधिकतम घरों में राज्य सरकार की किसी न किसी योजना का लाभ जरूर मिल रहा है। अब तृणमूल कांग्रेस ने इसे एक बार फिर नए सिरे से कनेक्ट करना शुरू कर दिया है।

वामदल और कांग्रेस खड़ी कर सकते हैं मुसीबत

ममता को भाजपा से ज्यादा अभी मुख्य खतरा कांग्रेस और वामदल के मिलकर चुनाव लड़ने से है। मिदनापुर से राधेश्याम मोदनवाल बताते हैं कि इस बार के चुनाव में दोनों दलों के बीच में चुनाव से पहले का तालमेल हो गया है। यह गठबंधन धर्म निरपेक्षता की राजनीति करता है और इसके प्रत्याशी तृणमूल कांग्रेस के वोट में बड़ी सेंध लगा सकते हैं। ममता बनर्जी की योजना इस नुकसान को कम करने पर टिक गई है। क्योंकि इससे तृणमूल कांग्रेस को जहां नुकसान उठाना पड़ेगा, वहीं भाजपा को इसका लाभ मिल सकता है।

राधेश्याम कहते हैं कि उन्हें यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि भाजपा पश्चिम बंगाल की दूसरे नंबर की पार्टी बन चुकी है। लोकसभा चुनाव में भाजपा के 18 उम्मीदवार जीतकर सांसद बने हैं। तृणमूल कांग्रेस के इस बार 22 सांसद ही चुनाव जीत पाए और कांग्रेस से केवल अधीर रंजन चौधरी सांसद बने। लेकिन 2019 के बाद से स्थितियां काफी तेजी से बदली हैं। वहीं भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष राजकमल पाठक कहते हैं कि प्रदेश की जनता बदलाव के लिए तैयार है। बस चुनाव की अधिसूचना जारी होने दीजिए। इसके बाद अपने आप सबकुछ सामने आ जाएगा।

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