उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में सेवा देने वाले डॉक्टरों को पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल कोर्स में 30 फीसदी आरक्षण नहीं बल्कि 30 फीसदी अतिरिक्त प्रोत्साहन (इनसेंटिव) अंक मिलेंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले पर अपनी मुहर लगा दी है जिसमें उत्तर प्रदेश सरकार के इस निर्णय को निरस्त कर दिया गया था जिसमें पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल कोर्स के दाखिले में 30 फीसदी सीटें ग्रामीण या दूर दराज क्षेत्र में सेवा देने वाले डॉक्टरों को आरक्षण देने का निर्णय लिया गया था। हालांकि शीर्ष अदालत ने ग्रामीण या दूर दराज के इलाकों में सेवा देने वाले डॉक्टरों को पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल कोर्स में 30 फीसदी अतिरिक्त प्रोत्साहन (इनसेंटिव) अंक देने की बात कही है।
सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि शहरी इलाकों में डॉक्टरों की संख्या तो बहुत है लेकिन ग्रामीण या दूर दराज इलाकों में डॉक्टरों की संख्या कम है। डॉक्टर वहां जाना नहीं चाहते हैं। राज्य सरकार केप्रयासों के बावजूद ग्रामीण इलाकों में स्थित जन स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की भारी कमी है। पीठ ने यह पाया कि यह समस्या उत्तर प्रदेश में नहीं बल्कि पूरे देश भर में है। ग्रामीण इलाकों में लिहाजा जन हित को देखते हुए ग्रामीण इलाकों में सरकारी सेवा देने वाले डॉक्टरों को अतिरिक्त प्रोत्साहन (इनसेंटिव) अंक दिया जाना चाहिए।