विभिन्न बैंकों के एटीएम पर बीते पांच दिनों से जारी मारामारी से जल्द निजात मिलने की उम्मीद कम है। दरअसल 8 नवंबर की रात 500 और 1000 के नोट को प्रचलन से बाहर करने और 2000 के अलावा इनकी जगह नए नोट उतारने की घोषणा के बाद बैंक को एटीएम के लिए नए सॉफ्टवेयर की अचानक जरूरत पड़ गई है। चूंकि नए नोटों का डिजाइन इन बैंकों के पास उपलब्ध नहीं था, ऐसे में नए नोट के आने के बाद बैंकों ने नया सॉफ्टवेयर डेवलप करना शुरू किया है। इस क्रम में पहले बैंक अपना सॉफ्टवेयर डेवलप करने के बाद इसका परीक्षण करेंगे। इसके बाद इन्हें एटीएम में डालने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। चूंकि यह प्रक्रिया सभी एटीएम के संदर्भ में अपनानी होगी, जाहिर है कि इस कारण व्यवस्था चाकचौबंद होने में लंबा समय लगेगा।
अतिविशिष्ट सूत्रों के मुताबिक रिजर्व बैंक भले ही नए और 100 के नोटों की कमी नहीं होने का दावा कर रहा है, मगर हकीकत यह है कि छोटे नोट की बेहद कमी है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सभी प्रमुख बैंकों ने अपने अपने ब्रांचों को 100 रुपये के ऐसे नोट को भी वितरित करने का निर्देश जारी किया है, जिन्हें विभिन्न कमियों के कारण रिजर्व बैंक को वापस लौटाए जाने के लिए रखा गया था। इसके बावजूद हालात में सुधार नहीं आ रहे। छोटे नोट की कमी केकारण 2000 के नए नोट के बाजार में उतरने से भी मारामारी रोकने में कामयाबी नहीं मिल रही।
उक्त सूत्र के मुताबिक एटीएम केलिए सॉफ्टवेयर और नया ट्रे तैयार होने केबावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में समस्या जारी रहेगी। ऐसा इसलिए कि एटीएम में नया सॉफ्टवेयर डालने केलिए पहले महानगरों और बड़े शहरों को प्राथमिकता दी जाएगी। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री ने नोट बंदी की घोषणा के दिन दो तीन दिनों में हालात सामान्य होने की बात कही थी। जबकि शनिवार को वित्त मंत्री ने इसके लिए दो तीन हफ्ते का वक्त लगने का अंदेशा जताया था। जबकि बैंक से जुड़े सूत्रों का मानना है कि हालात सामान्य होने में एक महीने से ज्यादा वक्त लगेगा।