धार्मिक आयोजनों, यज्ञ, गरबा जैसे कार्यक्रमों में पहुंचकर जनता को लुभाने की कोशिश करने वाले नेताओं की मुराद इस बार पूरी नहीं होगी। चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों के नेताओं को दुर्गा पूजा पंडाल और गरबा जैसे कार्यक्रमों में तामझाम के साथ ना जाने की हिदायत दी है। दरअसल चुनाव आयोग ने इस मामले में नेताओं को करारा झटका दिया है।
मध्य प्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के मुताबिक कोई भी राजनेता तामझाम के साथ दुर्गा पूजा और भंडारे में शामिल नहीं हो सकेंगे। वो सिर्फ साधारण व्यक्ति के तौर पर पूजा और भंडारे में शामिल होकर प्रसाद ग्रहण कर सकते हैं और ना ही मंच पर वह तामझाम के साथ जा सकते हैं।
दरअसल दुर्गा पूजा और गरबे जैसे कार्यक्रमों के दौरान प्रतिमा स्थापना के समय ज्यादातर नेता अपने समर्थकों के साथ उपस्थित रहते हैं। होर्डिंग-बैनरों के साथ अपनी उपस्थिति वोटरों के सामने दर्ज कराने का इनके पास इससे अच्छा मौका नहीं होता है।
ज्यादातर जगहों पर इनके समर्थक ही नेता की फोटो होर्डिंग के साथ प्रतिमा की स्थापना करते हैं। अकेले भोपाल में ही 500 से ज्यादा जगहों पर दुर्गा प्रतिमाओं की स्थापना की जाती है, साथ ही प्रदेश में यह संख्या हजारों तक पहुंचती है।
ऐसे में उन विधायकों और नेताओं को तगड़ा झटका लगा है, जिन्होंने रणनीति बना रखी थी कि वह नवरात्रि शुरू होते ही दुर्गा पंडालों की स्थापना में अपने होर्डिंग्स लगवा कर और गरबा और भंडारे जैसे कार्यक्रमों में शामिल होकर वोटरों में पैठ बनाएंगे, लेकिन आचार संहिता लागू होते ही इन नेताओं के सपनों पर पानी फिर गया है।