भाजपा का मानना है कि यदि कुछ हिंदू इस सूची से बाहर रह भी जाते हैं तो उन्हें नागरिकता कानून के तहत देश का नागरिक मान लिया जाएगा। लेकिन समस्या यह है कि अभी यह कानून बन ही नहीं पाया है। लोकसभा से सिटीजनशिप विधेयक आठ जनवरी को पारित हो गया था। लेकिन राज्यसभा से पारित न होने के कारण यह कानून में नहीं बदल पाया।
नई लोकसभा के गठन के बाद सरकार को इसे दोनों सदनों से दोबारा पारित कराना होगा। इस कानून के तहत पड़ोसी देशों में अल्पसंख्यक हिंदू, बौद्ध, जैन, पारसी, सिख जैसे धर्म के लोगों को वहां परेशान किया जाता है इसलिए यदि वे भारत में प्रवेश कर यहां की नागरिकता लेना चाहते हैं तो उन्हें इस कानून के तहत भारत का नागरिक माना जाएगा।