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Bilkis Bano Case: बिलकिस बानो केस के दोषी गुजरात पुलिस के संपर्क में नहीं, दाहोद एसपी ने सरेंडर पर कही यह बात

Wed, 10 Jan 2024 02:34 AM IST
गुलाम अहमद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दाहोद (गुजरात)

सार

दाहोद के एसपी ने बताया कि दोषी पुलिस के संपर्क में नहीं हैं। उनमें से कुछ अपने रिश्तेदारों से मिलने गए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि पुलिस को अभी सुप्रीम कोर्ट के फैसले की कॉपी भी नहीं मिली है।
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बिलकिस बानो मामले में जेल से छूटने के बाद दोषी - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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गुजरात पुलिस ने मंगलवार को कहा कि सुप्रीम कोर्ट की तरफ से गुजरात सरकार की सजा माफी के निर्णय को खारिज करने के बाद बिलकिस बानो केस के दोषियों के सरेंडर के बारे में उसे अभी कोई जानकारी नहीं है। दाहोद के पुलिस अधीक्षक बलराम मीणा ने बताया कि दोषी सिंगवाद तालुका में रहते हैं, जहां सोमवार सुबह ही पुलिस बल को तैनात कर दिया गया। एसपी ने बताया कि दोषी पुलिस के संपर्क में नहीं हैं। उनमें से कुछ अपने रिश्तेदारों से मिलने गए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि पुलिस को अभी सुप्रीम कोर्ट के फैसले की कॉपी भी नहीं मिली है।

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एसपी मीणा ने मीडिया को बताया, पुलिस को दोषियों के सरेंडर के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है और हमें सुप्रीम कोर्ट के फैसले की प्रति नहीं मिली है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के फैसला सुनाए जाने से पहले ही सिंगवाड तालुका में पुलिस बल तैनात कर दिया गया था, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सांप्रदायिक संघर्ष न भड़के और कानून-व्यवस्था बनी रहे। उन्होंने कहा कि पूरे रणधीकपुर थाना क्षेत्र में पुलिस तैनात है।

सुप्रीम कोर्ट ने रद्द की दोषियों की सजा माफी
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बिलकिस बानो से सामूहिक दुष्कर्म और उनके परिवार के सात लोगों की हत्या के मामले में सजा काट रहे 11 दोषियों को समयपूर्व रिहा करने के गुजरात सरकार के फैसले को रद्द कर दिया था। अदालत के फैसले के बाद सभी दोषियों को सरेंडर करना है, लेकिन अभी तक उनका कोई सुराग नहीं है। उम्र कैद की सजा काट रहे इन दोषियों को 15 अगस्त 2022 को रिहा कर दिया गया था। दोषियों की रिहाई के बाद बिलकिस बानो और उनके परिवार ने गुजरात सरकार के फैसले पर निराशा जताई थी और सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
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साल 2002 में गोधरा ट्रेन जलाने की घटना के बाद गुजरात में सांप्रदायिक दंगे भड़क गए थे। इस दौरान पांच महीने की गर्भवती बिलकिस बानो के साथ दुष्कर्म किया गया था। साथ ही दोषियों ने उनकी तीन साल की बेटी और परिवार के छह अन्य सदस्यों को मौत के घाट उतार दिया था।

कोर्ट ने की थी अहम टिप्पणी
फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जहां कानून का शासन लागू करने की आवश्यकता होती है वहां करुणा और सहानुभूति की कोई भूमिका नहीं होती है। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने बिलकिस बानो मामले में 11 दोषियों को आत्मसमर्पण करने का आदेश देते हुए कहा, कानून के शासन का अस्तित्व और कानून के दायरे में लाए जाने का डर उन लोगों के लिए एक निवारक के रूप में काम करता है, जिन्हें अपने हितों के लिए दूसरों की हत्या करने में कोई संकोच नहीं होता।

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