मिड डे मील के तहत स्कूलों में खाना बनाने वाले कुक और हेल्पर का वेतन बढ़ाने के राज्य सरकारों के प्रस्ताव को केंद्र ने ठुकरा दिया है। केंद्र का कहना है कि कुक और हेल्पर का वेतन बढ़ाने व तय करने का अधिकार राज्य सरकारों का है। राज्य अधिक वेतन बढ़ाने चाहते हैं तो वे अपने खर्चे से बढ़ा सकते हैं।
मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, पिछले दिनों उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों ने मिड-डे-मील का खाना बनाने वाले कुक और हेल्पर का वेतन बढ़ाने के लिए मंत्रालय को पत्र लिखा था। इस प्रस्ताव में राज्यों का कहना था कि कुक और हेल्पर का वेतन बेहद कम है, इसलिए इनका वेतन बढ़ाया जाना चाहिए।
हालांकि मंत्रालय ने इस प्रस्ताव को यह कहकर ठुकरा दिया कि केंद्र मिड-डे-मील के तहत एक तय रकम राज्यों को देता है, लेकिन यदि कोई राज्य मिड-डे-मील के मेन्यू में बदलाव करते हुए उसमें कुछ अन्य खाद्य प्रोडक्ट शामिल करना चाहते हैं तो उसका फैसला राज्य अपने स्तर पर कर सकते हैं।
कुक और हेल्पर को दी जाने वाली धनराशि विभिन्न राज्य सरकारों ने अपने स्तर पर अलग-अलग निर्धारित कर रखी है। यूपी में एक हजार रुपये दिए जाते हैं। जबकि तमिलनाडु सरकार न्यूनतम मजदूरी के तहत पांच हजार से अधिक रुपये देती है। कई राज्य तीन हजार रुपये भी दे रहे हैं।