चंद्रपुर में पत्रकारों से बात करते पेट्रोलियम मंत्री ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार (महाराष्ट्र) ने
तेल रिफाइनरी परियोजना के लिए भूमि आवंटित की थी लेकिन बाद में स्थान बदलने के बहाने मना कर दिया, जिससे परियोजना पटरी से उतर गई।
केंद्र ने महाराष्ट्र में किसी क्षेत्र में तेल रिफाइनरी परियोजना स्थापित करने का कोई फैसला नहीं लिया है। यह बात पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कही।
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पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार को केंद्र सरकार के साथ परियोजना के स्थान पर चर्चा करनी होगी। चंद्रपुर में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने परियोजना के लिए भूमि आवंटित की थी लेकिन बाद में स्थान बदलने के बहाने मना कर दिया, जिससे परियोजना पटरी से उतर गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि इसके चलते राज्य और देश को पिछले ढाई साल में भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा।
पुरी रत्नागिरी रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल परियोजना का जिक्र कर रहे हैं। तेल रिफाइनरी को रत्नागिरी जिले के नानार गांव में बनाने का प्रस्ताव था, लेकिन भाजपा के तत्कालीन गठबंधन सहयोगी शिवसेना के आग्रह पर 2019 के चुनाव से पहले इसे खत्म कर दिया गया था।
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पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि साठ मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष की तेल रिफाइनरी दुनिया का सबसे बड़ा संयंत्र होगा। उन्होंने कहा कि अगर इसे देश में कही स्थापित किया जाता है तो यह उस राज्य में आर्थिक परिदृश्य को बहुत तेजी से बदलने की क्षमता रखता है।
उन्होंने बताया कि औद्योगिक संघ ने पूर्वी महाराष्ट्र के विदर्भ इलाके में 20 मिलियन मीट्रिक टन क्षमता की तेल रिफाइनरी स्थापित करने की सिफारिश की गई है, जिसमें खनिजों, धातुओं आदि का बहुत बड़ा दायरा है।
पुरी ने आगे बताया कि केंद्र सरकार को ऐसे मुद्दो की सिफारिश करने का सुझाव मिला है, हम उस पर गौर करेंगे। हालांकि मैंने चंद्रपुर या विदर्भ क्षेत्र में कोई तेल रिफाइनरी स्थापित करने पर कोई निर्णय नहीं लिया है।