सुप्रीम कोर्ट ने जेनिटिकली मोडिफाइड(जीएम) यानी जीन केहेरफेर से तैयार सरसों के किस्म के व्यावसायिक इस्तेमाल पर 17 अक्टूबर तक केलिए रोक लगा दी है। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार से कहा कि बुआई में जीएम सरसों के इस्तेमाल शुरू करने से पहले जनता की राय जानने के लिए कहा है। शीर्ष अदालत ने अरूणा रूद्रीगेज द्वारा एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया है।
चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) तुषार मेहता से कहा कि 17 अक्टूबर तक जीएम सरसों का व्यावसायिक इस्तेमाल न हो। अगली सुनवाई 17 अक्टूबर को निर्धारित की गई है। एएसजी तुषार मेहता ने पीठ ने भरोसा दिलाया कि 17 अक्टूबर तक जीएम सरसों का व्यावसायिक इस्तेमाल की इजाजत नहीं दी जाएगी। साथ ही उन्होंने कहा कि लोगों की राय ली जाएगी और उन रायों को कमेटी के पास रखा जाएगा।
याचिका में कहा गया है कि इसके व्यवासायिक इस्तेमाल से पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। याचिका में आरोप लगाया गया कि बिना पुख्ता टेस्ट के इसके इस्तेमाल करने का फैसला लिया जा रहा है।