भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (
यूआईडीएआई) ने दावा किया है कि आधार इंस्क्रिप्शन को भेदने के लिए पूरे ब्रह्मांड की ताकत चाहिए। यूआईडीएआई ने इस आरोप को नकार दिया कि आधार का बायोमैट्रिक डाटा सुरक्षित नहीं है।
चीफ जस्टिस
दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय पीठ केसमक्ष पावर प्वाइंट प्रजेंटेशन के जरिए यूआईडीएआई के सीईओ अजय भूषण पांडेय ने कहा कि आधार का बायोमैट्रिक डाटा पूरी तरह सुरक्षित है। यह 2048 बिट इंस्क्रिप्शन सिस्टम है जो सामान्य इंस्क्रिप्शन केमुकाबले आठ गुना मजबूत है। सीईओ ने कहा कि इस इंस्क्रिप्शन को भेदने के लिए पूरे ब्रह्मांड की ताकत चाहिए।
सीईओ ने कहा कि बिना किसी की इजाजत के आधार डाटा को साझा नहीं किया जाता। कुछ विशिष्ट परिस्थितियों में ऐसा किया जाता है लेकिन इसके लिए जिला जज से अनुमति लेनी होती है। राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े में मामले में भी ऐसा होता है। हालांकि उन्होंने कहा कि अब तक किसी एजेंसी ने राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर डाटा नहीं लिया है। यहां तक कि सीबीआई को भी डाटा देने से इनकार कर दिया गया है।
इस पर संविधान पीठ के सदस्य एके सिकरी ने 49 हजार पंजीकरण ऑपरेटरों के लाइसेंस रद्द करने के बारे में सवाल किया। न्यायमूर्ति सिकरी ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में लाइसेंस रद्द होने का कारण भ्रष्टाचार या जनसंख्यिकीय डाटा की गुणवत्ता रही होगी। जवाब में सीईओ ने कहा कि यूएआईएआई में सख्त गुणवत्ता नियंत्रण मानक है।
सीईओ ने कहा कि यूएआईएआई लगातार यह निर्देश जारी करती रहती है कि बायोमैट्रिक डाटा फेल होने की स्थिति में किसी भी सुविधा से महरूम न रखा जाए। उन्होंने बताया कि आधार पंजीकरण केंद्र न केवल बैंक और डाकघरों में बल्कि जेलों में भी बनाए गए। सीईओ ने बताया कि वर्ष 2009 से पहले नागरिकों के लिए राष्टीय पहचान पत्र नहीं था। उन्होंने बताया कि उनकेपास भी पहचान पत्र नहीं था क्योंकि वह एक छोटे से गांव से आए थे।
पावर प्वाइंट प्रजेंटेशन केलिए अदालत कक्ष में प्रोजेक्टर्स के साथ दो एलसीडी मशील लगाए गए थे। लेकिन दोपहर 2.30 बजे जब प्रजेंटेशन की शुरुआत होने वाली थी उस वक्त तकनीकी खामियों की वजह से एक प्रोजेक्टर चल नहीं सका। लिहाजा एक ही प्रोजेक्टर से ही काम हुआ।