'नो मनी फॉर टेरर' मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (काउंटर-टेररिज्म फाइनेंसिंग) के समापन सत्र में आतंकवाद को लेकर कई तथ्यों का खुलासा हुआ है। आने वाले समय में भारत, वैश्विक स्तर आतंकवाद को खत्म करने में अहम भूमिका निभाएगा। शनिवार को कई देशों ने आतंकवाद पर अपनी बात रखी। आस्ट्रेलिया के प्रतिनिधि ने सम्मेलन में कहा, टेरर फाइनेंसिंग के अलावा अब एक और बड़ा खतरा सामने आ रहा है। वह खतरा, आतंकियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले हथियारों को लेकर है। अब दुनिया के आतंकी संगठन, केमिकल और बायोकेमिकल हथियारों की तरफ बढ़ रहे हैं। विभिन्न राष्ट्रों के सामने यह एक बड़ी चुनौती है।
कई देशों ने दिए जरूरी सुझाव
सम्मेलन के समापन सत्र में डीजी एनआईए दिनकर गुप्ता ने केंद्रीय गृह मंत्री की मौजूदगी में कहा, सभी देशों ने टेरर फाइनेंसिंग को रोकने के लिए व्यावहारिक समाधान पर जोर दिया है। चूंकि सभी राष्ट्रों के अपने-अपने कानून हैं, इसलिए उन्हें अपने विधायी प्रावधानों के तहत ही नियम बनाने होंगे। भले ही वे कानून, उनके अपने क्षेत्र में ही काम करेंगे, लेकिन उनका समन्वय एवं सहयोग, सभी राष्ट्रों के साथ रहेगा। फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की सिफारिशों को गंभीरता के साथ लागू करना पड़ेगा। इस बाबत कई देशों ने मूल्यवान एवं दूरगामी सुझाव दिए हैं। सम्मेलन में भाग लेने वाले अधिकांश देशों की सहमति थी कि वे अपने अपने अधिकार क्षेत्र में एफएटीएफ की सिफारिशों को जल्द लागू करने का काम करेंगे।
आस्ट्रेलिया की तरफ से कहा गया कि आतंकी संगठन अब नित्य नए तरीके अपना रहे हैं। टेरर फाइनेंसिंग के अलावा उनके पास मौजूद घातक हथियारों को भी देखना होगा। वैश्विक आतंकी संगठन, अब केमिकल और बायोकेमिकल हथियारों तक पहुंच चुके हैं। अगर इनका बड़े स्तर पर इस्तेमाल होता है, तो वह दुनिया में शांति, सुरक्षा एवं संम्प्रभुता के लिए ठीक नहीं होगा। आतंकी संगठनों की ओर से आने वाली यह एक नई चुनौती है। सभी देशों को मिलकर इसका सामना करना है। कनाडा की ओर से कहा गया कि वर्चुअल एसेट्स का गैरकानूनी मकसद के लिए दुरुपयोग किया जा रहा है। यह भी एक बड़ी चिंता का विषय है। सिंगापुर के प्रतिनिधि ने कहा, टेरर फंडिंग पर नकेल कसने के लिए जिस नई व्यवस्था पर काम हो रहा है, उसमें 'पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप' की भूमिका का पता लगाना होगा। टेरर फंडिंग को रोकने के लिए पीपीपी मॉडल पर काम करने की जरूरत है।
भारत में 'स्थायी सचिवालय' बनाने की तैयारी
सूत्रों का कहना है कि टेरर फाइनेंसिंग को रोकने के लिए भारत में 'स्थायी सचिवालय' बनाने के लिए प्रयास शुरू हुआ है। इस बाबत सभी सदस्य देशों की राय ली जा रही है। चूंकि भारत ने कश्मीर व दूसरे क्षेत्रों में आतंक का लंबा दौर देखा है। आतंकियों की नई-नई तकनीकों से भारत वाकिफ है। यह भी मालूम है कि कौन से देश, आतंकियों के मददगार बने हैं। केंद्रीय गृह मंत्री शाह ने कहा, एक व्यापक मॉनिटरिंग फ्रेमवर्क स्थापित करना बहुत जरूरी है। इसमें सभी इंटेलिजेंस तथा इन्वेस्टीगेशन एजेंसियों में कोऑपरेशन, कोऑर्डिनेशन तथा कोलेबोरेशन होना चाहिए। ट्रेस, टारगेट और टर्मिनेट की स्ट्रेटेजी को निम्नस्तरीय आर्थिक अपराध से लेकर संगठित आर्थिक अपराध तक अपनाना होगा।
टेरर फाइनेंस से संबधित लीगल स्ट्रक्चर्स को मजबूत करना तथा उनमें एकरूपता लानी पड़ेगी। नेक्स्ट जेनेरेशन टेक्नोलॉजी के दुरुपयोग के खिलाफ एक मजबूत तंत्र विकसित करना होगा। एसेट रिकवरी के लिए कानूनी और नियामक ढांचे को मजबूत करना जरूरी है। शाह ने कहा कि इस दिशा में आगे बढ़ते हुए भारत में एक स्थायी सचिवालय स्थापित करने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया जा रहा है। इस पर, शीघ्र ही सभी प्रतिभागियों की बहुमूल्य टिप्पणियां प्राप्त करने के लिए एक डिस्कशन पेपर सर्कुलेट किया जाएगा।