निजामुद्दीन मरकज के बाहर ड्यूटी पर सीआरपीएफ के जवान
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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उन पांच मलेशियाई नागरिकों की उस याचिका पर सुनवाई करने के लिए हरी झंडी दिखा दी, जो इस साल मार्च में यहां के निजामुद्दीन में तब्लीकी जमात के मरकज में शामिल हुए थे। इन पांचों ने मरकज में शामिल होने के लिए अपने खिलाफ बिहार सरकार की तरफ से फॉरनर्स एक्ट के उल्लंघन के लिए दर्ज कराया गया मुकदमा खारिज करने की गुहार लगाई है।
जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस कृष्ण मुरारी ने याचिकाकर्ताओं को याचिका की एडवांस कॉपी दिए जाने का निर्देश दिया है।
पीठ ने कहा, याचिकाकर्ताओं के वकील को अनुमति दी जाती है कि वह ऑन-लाइन या ईमेल से बिहार राज्य के लिए स्टैंडिंग काउंसल को याचिका की एडवांस कॉपी सौंप दे। पीठ ने कहा, बिहार सरकार के स्टेंडंग काउंसल साहिल राविन नोटिस को स्वीकार करने के लिए सहमत हैं।
इसके साथ ही पीठ ने इस मामले को 15 अक्टूबर रिट याचिका व अन्य संबद्ध मामलों के साथ सूचीबद्ध करने का निर्देश अपनी रजिस्टरी को दिया।
इससे पहले एडवोकेट फौजिया शकील ने मलेशियाई नागरिकों की तरफ से याचिका दाखिल की। शकील ने पीठ से मांग की कि उनके मुवक्किलों के खिलाफ केंद्र व बिहार सरकार की तरफ से की गई कार्रवाई को भारतीय संविधान में विदेशी नागरिकों को दिए गए मौलिक अधिकारों का हनन घोषित किया जाए।
उन्होंने बिहार सरकार को अपने मुवक्किलों के खिलाफ दर्ज मुकदमा वापस लेने और केंद्रीय गृह मंत्रालय को उन्हें ब्लैक लिस्ट से हटाकर उनका वीजा दोबारा मान्य करने का निर्देश देने की मांग की ताकि वे सभी सुरक्षित अपने घर वापस लौट सके।