नीतीश,पासवान और कुशवाहा के साथ मिल जाने से जो समीकरण बन रहा है उस हिसाब से गैर-यादव ओबीसी और महादलितों को मिलाकर 38 प्रतिशत का वोटबैंक बनता है। नीतीश,पासवान और कुशवाहा का नया गठबंधन और नई तिकड़ी क्या कमाल करेगी इसपर अभी से कई सवाल उठने लगे हैं।
नीतीश कुमार को राज्य में कुर्मी और कोयरी जातियों के प्रतिनिधि के तौर पर देखा जाता है। उपेंद्र कुशवाहा कोयरी वोटबैंक पर पहले ही सेंध लगा चुके हैं। लेकिन अगर कुशवाहा भी नीतीश के साथ आते हैं तो वह और मजबूत होंगे।
वैसे इन तीनों में भी दरार कम नहीं रही है। जब नीतीश कुमार ने पिछले चुनाव में दलितों पर मास्टर स्ट्रोक खेलते हुए दलितों में महादलित की घोषणा की थी तो राम विलास पासवान ने इसका विरोध किया था।
महादलित आयोग की सिफारिशों पर, 22 दलित जातियों में से 18 (धोबी, मुसहर, नट, डोम और अन्य) को महादलित का दर्जा दे दिया गया था। दलितों की कुल आबादी में इनकी संख्या 31 फीसदी के लगभग है। इतना ही नहीं चमार, पासी और धोबी को भी इसमें शामिल कर दिया था। अब सिर्फ पासवान (दुसाध) ही महादलित से बाहर हैं जिन्हें राम विलास पासवान का वोटबैंक कहा जाता है। माना ये जा रहा है कि मुख्यमंत्री दलितों के राष्ट्रीय अधिवेशन में पासवान को महादलित की श्रेणी में शामिल करने की घोषणा कर सकते हैं। आपको बता दें कि नीतीश ने जब महादलित श्रेणी बनाई थी तब उन्होंने इसमें पासवान को शामिल नहीं किया था।
वहीं राजनीतिक जानकारों का कहना है कि उपेंद्र कुशवाहा को आरजेडी में शामिल होने के लिए खुला निमंत्रण मिला है। कुशवाहा दिल्ली के एम्स अस्पताल में पिछले दिनों लालू यादव से भी मिलने पहुंचे थे । इसके अलावा बीजेपी के वरिष्ठ नेता ने पासवान का किसी और गठबंधन या पार्टी में शामिल होने की खबरों को सिरे से नकार दिया है। बीजेपी के वरिष्ठ नेता ने कहा कि 14 को हो रहे दलित अधिवेशन का निमंत्रण तो डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी को भी मिला है और वह भी उस अधिवेशन में शामिल होंगे।
इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि वह कोई अलग फ्रंट बनाएंगे।उन्होंने आगे कहा कि सुशील मोदी जैसे लोग बीजेपी के लिए जी भी सकते हैं और मर भी सकते हैं। वहीं आरजेडी भी दावा कर रही है कि पासवान जल्द ही महागठबंधन में शामिल हो सकते हैं। आरजेडी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद सिंह ने कहा कि पासवान और आरजेडी के बीच बातचीत चल रही है। पासवान एनडीए में रहकर घुटन महसूस कर रहे हैं।