विपक्षी दलों के फैसले से ठीक एक दिन पहले नीतीश कुमार द्वारा भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद का समर्थन करने के ऐलान को अधिसंख्य जद यू नेता पचा नहीं पा रहे हैं। फिर संयुक्त विपक्ष द्वारा लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार को उम्मीदवार बनाये जाने से जदयू के भीतर असमंजस और बढ़ गया है।
अब जदयू के नेताओं को लगता है कि भले ही कोविंद बिहार के राज्यपाल रहे हों लेकिन मीरा कुमार बिहार की बेटी हैं और देश की दलित राजनीति में कोविंद के मुकाबले खासा बड़ा नाम हैं। नाम न छापने की शर्त पर जदयू के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि खुद नीतीश जी को भी अब अपने फैसले का राजनीतिक बचाव करना मुश्किल होगा।
दरअसल नीतीश कुमार शुरू से ही बिहार के हितों और बिहारी अस्मिता को अपना मुख्य मुद्दा बनाते रहे हैं। बिहार विधानसभा चुनाव में नीतीश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डीएनए वाले बयान और 1,25 लाख करोड़ रु के पैकेज की घोषणा के अंदाज को बिहार के अपमान का कारगर मुद्दा बनाया था।
एनडीए में रहते हुए भी नीतीश ने हमेशा बिहार के विकास और गौरव को हमेशा आगे रखा। यूपीए सरकार के दौरान नीतीश ने दिल्ली में बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर विशाल रैली भी की थी।