बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की पुष्टि करने के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट कर इसकी जानकारी दी है। उनके इस फैसले के बाद कांग्रेस ने भाजपा को घेरा है। सांसद जयराम रमेश ने इसे बिहार में नेतृत्व तख्तापलट करार दिया है। साथ ही बिहार के जनादेश के साथ विश्वासघात बताया है।
क्या बोले जयराम रमेश?
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा कि बिहार चुनाव प्रचार के समय कांग्रेस जो बात कह रही थी, वह अब सच साबित हो गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि 'जी2' ने मिलकर सत्ता में बदलाव और तख्तापलट किया है। उनके अनुसार, यह कई मायनों में लोगों के जनादेश के साथ विश्वासघात है।
नीतीश कुमार एक्स पर दी जानकारी
नीतीश कुमार ने खुद साफ किया है कि वह इस बार राज्यसभा जाना चाहते हैं। उन्होंने 'एक्स' पर अपनी बात साझा की। नीतीश ने कहा कि वह राज्यसभा के सदस्य बनना चाहते हैं, लेकिन बिहार के लोगों से उनका रिश्ता भविष्य में भी बना रहेगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि एक विकसित बिहार बनाने के लिए वह लोगों के साथ मिलकर काम करते रहेंगे। नीतीश ने यह भी कहा कि राज्य में जो नई सरकार बनेगी, उसे उनका पूरा सहयोग और मार्गदर्शन मिलता रहेगा।
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सबसे लंबे समय तक रहे मुख्यमंत्री
यह घटनाक्रम तब सामने आया है जब नीतीश कुमार ने 2025 के चुनाव में अपनी पांचवीं जीत दर्ज की है। इस चुनाव में एनडीए (एनडीए) ने दो-तिहाई बहुमत हासिल किया। नीतीश कुमार ने 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। वह बिहार के इतिहास में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले व्यक्ति हैं।
क्या है नीतीश राजनीतिक सफर?
नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। उन्होंने 1985 में विधायक के रूप में राजनीति में कदम रखा था। साल 1994 में उन्होंने जॉर्ज फर्नांडिस के साथ मिलकर समता पार्टी बनाई। वह 1996 में लोकसभा के लिए चुने गए और अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में केंद्रीय मंत्री के रूप में काम किया। साल 2005 में एनडीए ने बिहार विधानसभा में बहुमत पाया और नीतीश मुख्यमंत्री बने।
साल 2010 के चुनावों में उनके गठबंधन ने बड़ी जीत हासिल की। हालांकि, जून 2013 में उन्होंने भाजपा से नाता तोड़ लिया और आरजेडी व कांग्रेस के साथ गठबंधन कर लिया। 2014 में उन्होंने अपनी जगह जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बनाया, लेकिन 2015 में वह फिर इस पद पर लौटे और महागठबंधन को जीत दिलाई। 2017 में उन्होंने आरजेडी का साथ छोड़ा और फिर एनडीए में आ गए। 2022 में वह एक बार फिर महागठबंधन में शामिल हुए। जनवरी 2024 में उन्होंने फिर पाला बदला और भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाई। इसके बाद 2025 के चुनाव में उन्होंने भारी जीत हासिल की।
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