फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स

अंत और शुरुआत: राज्यसभा की राह पर नीतीश कुमार, बिहार की राजनीति में कैसे बदलेगा सत्ता का समीकरण?

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Shubham Kumar Updated Sat, 07 Mar 2026 04:53 AM IST

सार

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा के लिए नामांकन ने बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत दे दिए हैं। माना जा रहा है कि वे अब राष्ट्रीय राजनीति की ओर कदम बढ़ा सकते हैं। लेकिन उनके इस फैसले से जनता दल (यूनाइटेड) के भविष्य और नए नेतृत्व को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। सवाल यह है कि क्या नीतीश के बाद बिहार की राजनीति में नया नेतृत्व उभरेगा?

विज्ञापन
विज्ञापन
नीतीश कुमार - फोटो : अमर उजाला


2004 के लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करने के बाद उन्होंने कोई प्रत्यक्ष चुनाव नहीं लड़ा। जब उन्होंने पहली बार बिहार की सत्ता संभाली, तब यह राज्य पिछड़ेपन, अपराध और अव्यवस्था से जूझ रहा था। उस दौर में, उन्होंने सुशासन, सड़क निर्माण, शिक्षा और महिला सशक्तीकरण जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित कर बिहार की राजनीति को विकास के विमर्श की ओर मोड़ने का प्रयास किया।


ये भी पढ़ें:- पश्चिम एशिया संकट से बढ़ेगा भारतीय रुपये पर दबाव?: बढ़ती तेल व उर्वरक कीमतें महंगाई बढ़ा सकती हैं


बिहार की राजनीति में नीतीश की भूमिका

हालांकि लगातार बदलते गठबंधनों ने उनके राजनीतिक कौशल और व्यावहारिकता को तो दिखाया, पर इससे उनकी विश्वसनीयता पर भी सवाल उठे। बावजूद इसके, बिहार की राजनीति में उनकी केंद्रीय भूमिका बनी रही। नीतीश के स्वास्थ्य को देखते हुए यह तय ही माना जा रहा था कि बतौर मुख्यमंत्री वह मौजूदा कार्यकाल पूरा नहीं कर सकेंगे, लेकिन यह इतनी जल्दी होगा, इसकी उम्मीद शायद ही किसी को होगी।


जेद (यू) के सामने नेतृत्व का संकट

नीतीश के समर्थक बेशक इसे स्वीकार नहीं कर पा रहे हों, लेकिन बताया जा रहा है कि राज्यसभा जाने का फैसला उनका अपना है। इससे जद (यू) के सामने नेतृत्व का संकट भी खड़ा हो सकता है, क्योंकि उसके पास स्थानीय स्तर पर कोई उस कद का नेता नहीं है। क्या नीतीश के बेटे निशांत कुमार इस भूमिका को संभाल सकेंगे, इस बारे में कुछ कहना अभी मुश्किल है।


ये भी पढ़ें:- 50 हजार तक डिजिटल धोखाधड़ी पर मुआवजा: एक जुलाई से लागू होंगे आरबीआई के नए नियम, पांच दिन में करनी होगी शिकायत


एनडीए के वरिष्ठ नेता के रूप में रहेंगे सक्रिय

अब इसमें संदेह नहीं कि नीतीश राज्यसभा में एनडीए के एक वरिष्ठ नेता के रूप में सक्रिय रह सकेंगे, जहां उनकी अनुभवी आवाज संसदीय बहसों को प्रभावित करेगी। फिर भी, उनके इस निर्णय ने बिहार की राजनीति में एक शून्य तो पैदा कर ही दिया है। जहां तक बात बिहार के नए मुख्यमंत्री की है, तो इस बारे में अटकलें जारी हैं। लेकिन, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा का अनुभव और यहां तक कि भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व की उसी शैली को इंगित करता है, जिसमें महत्वपूर्ण पदों पर ऐसे व्यक्तियों की नियुक्ति होती है, जो चर्चा से बिल्कुल दूर रहते हैं। बिहार में भी ऐसा ही हो, तो हैरानी नहीं होनी चाहिए।
विज्ञापन


विज्ञापन
विज्ञापन
Next