राष्ट्रीय राजनीति में 2019 में तीसरे विकल्प के लिए नीतीश कुमार की अभी से शुरू हुई दावेदारी को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि अगले लोकसभा में तीसरे विकल्प के रूप में मुलायम सिंह यादव की अगुवाई में समाजवादी विचारधारा के लोगों की दावेदारी सबसे मजबूत होगी।
यूपी में खराब कानून व्यवस्था को लेकर निशाने पर रहे मुख्यमंत्री ने कहा कि अब प्रदेश में कोई दूसरा मुजफ्फरनगर दंगा नहीं दोहराया जाएगा। उन्होंने कहा कि नोएडा-गाजियाबाद में लाखों की संख्या में मकान खरीदकर बिल्डरों के चुंगल में फंसे लोगों को राहत दिलाने के लिए बिल्डरों पर कार्रवाई की जाएगी।
बुंदेलखंड में सूखा प्रभावितों को राहत मुहैया कराने आए अखिलेश यादव ने अमर उजाला से ललितपुर में खास बातचीत की। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश-
सवालः नरेंद्र मोदी को 2019 में चुनौती देने के लिए कांग्रेस की कमजोर हालत देख नीतीश कुमार ने मोर्चेबंदी शुरू कर दी है इसमें समाजवादी पार्टी कहां खड़ी है?
वैसे अभी यह जल्दबाजी है और सपा का पूरा फोकस 2017 में यूपी विधानसभा चुनाव जीतना है। उसके बाद ही हम अगले लोकसभा चुनाव की दशा-दिशा तय करेंगे। समाजवादी विचाराधारा वाले दल एकजुट होकर अगली सरकार बनाएं यह हम भी चाहते हैं। पर यह भी साफ है कि मुलायम सिंह यादव से बेहतर तीसरे विकल्प का दूसरा समाजवादी चेहरा नहीं है और हमारी राजनीतिक ताकत भी इनमें सबसे ज्यादा है।
सवालः आप केंद्र में अपनी सरकार की संभावनाएं देख रहे हैं पर 2012 के चुनाव के पहले डीपी यादव का टिकट काटने को जो दमखम आपने दिखाया उसकी झलक आपके शासन में नहीं दिखी है?
देखिए जो लोग सपा सरकार के अभूतपूर्व विकास कार्यों को पचा नहीं पा रहे वही लगातार कानून व्यवस्था का सवाल उठाते हैं। लूटपाट, आपसी जमीनी विवाद से लेकर तमाम तरह की छोटी घटनाओं को सरकार के माथे पर मढ़ दिया जाता है। कई घटनाओं को ऐसे बढ़ा चढ़ाकर पेश किया गया जैसे प्रशासन दोषी है मगर जांच में हकीकत दूसरी रही। लखनऊ के वकील की हत्या आपसी रंजिश का मामला था तो एनआईए अफसर तंजील अहमद का मामला भी दूसरी तरह का निकला।
सवालः पर मुजफ्फरनगर दंगों को लेकर आपकी सरकार पर उठे सवाल तो अब भी मौजू हैं?
यूपी में अब कोई दूसरा मुजफ्फरनगर नहीं होने दूंगा। मुजफ्फरनगर को दोहराने की बहुत कोशिशें अब भी हो रही हैं पर ऐसा करने वालों की चाल पर हमारी पल-पल निगाहें हैं।