जदयू को पिछले चुनाव में दो सीटों पर जीत हासिल हुई थी, लेकिन इस बार वह 17 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार सकती है। ऐसे में उसे सबसे ज्यादा फायदा है। वैसे जदयू और कांग्रेस दोनों के दो-दो सांसद हैं।
ऐसे में राजद और कांग्रेस के बीच सीटों के बंटवारे के बाद ही यह तय हो पाएगा कि सबसे अधिक फायदे में कौन सा दल रहा। अब तक की तस्वीर तो नीतीश कुमार को ही आगे बता रही है।
आज के फैसले के बाद भाजपा और जदयू अगर 17 सीटों पर चुनाव लड़ती है तो भाजपा सबसे अधिक नुकसान उठाएगी। वहीं रामविलास पासवान की पार्टी लोजपा पांच सीटों पर और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी आरएसएलपी दो सीटों पर चुनाव लड़ती है तो पिछले चुनाव के मुकाबले इन्हें भी एक एक सीट का नुकसान होगा।
यानी भाजपा, लोजपा और आरएलएसपी तीनों को ही पिछले लोकसभा चुनाव की तुलना में कम सीटें मिल रही हैं।
दिल्ली में नीतीश और अमित शाह के बीच सीटों के बंटवारे की दाल गलने के तुरंत बाद शुक्रवार को ही बिहार के अरवल में उपेंद्र कुशवाहा और तेजस्वी ने बंद कमरे में मुलाकात की। चिराग पासवान के भी तेजस्वी से फोन पर बात की चर्चा है।
ज्यादा सीटों और अपना चुनाव क्षेत्र बदलने की चाहत में कुशवाहा ने यदुवंशियों के दूध और कुशवंशियों के चावल को मिलाकर बढ़िया खीर पकाने की पहल कर दी है। राजग में कुशवाहा को महज दो सीटों पर संतोष करना पड़ सकता है जबकि राजद ने चार का भरोसा दे दिया है।