नीतीश कटारा हत्याकांड के दोषी विकास और सुखदेव
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हाईकोर्ट द्वारा नीतीश कटारा हत्याकांड को ऑनर किलिंग करार दिए जाने पर मुहर लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बलपूर्वक या धमकी व मानसिक रूप से प्रताड़ित कर किसी महिला की स्वतंत्रता और उसकी पसंद को खत्म करने की इजाजत नहीं दी जा सकती।
शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में ऑनर किलिंग को मध्यकालीन युग का सनकी कृत्य करार देते हुए कहा कि उसकी (भारती) की खुद की अपनी पसंद उसका आत्म सम्मान होता है और उस पर धब्बा लगाना उसकेसम्मान को नष्ट करना है। पिता या भाई या समाज के सम्मान का हवाला देते हुए उसकी पंसद केव्यक्ति को मारना अत्यंत बर्बर कृत्य है। पीठ ने कहा कि जाति के आधार पर खुद को ऊंचा समझने की भावना ने भाइयों को अंधा बना दिया। भाई यह भूल गए कि बहन को अपनी पंसद का जीवनसाथी बनाने का समान अधिकार है। साक्ष्यों से साफ है कि भारती और नीतीश का रिश्ता भाइयों को नामंजूर था और नीतीश को मारने की सिर्फ यही वजह थी।
पीठ ने कहा कि जिस तरह से नीतीश कटारा की हत्या केबाद शव को जलाया गया, इससे विकास और अन्य आरोपी की आपराधिक प्रवृति का बोध होता है। इन लोगों में न तो मनुष्य जीवन को लेकर कोई सम्मान था और न लाश को लेकर। ये इस कदर निष्क्रिय हो गए थे कि यह भूल गए कि मरे हुए व्यक्ति के साथ भी सम्मान किया जाना चाहिए। यह तो मूल मानवाधिकार है।