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EV: 36 राज्यों/यूटी में 26 हजार से ज्यादा ईवी चार्जिंग स्टेशन, 2023-24 में खपत हुई 1622.020 मिलियन यूनिट बिजली

सार

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन जयराम गडकरी ने बताया कि विद्युत मंत्रालय ने देश में जनता के लिए स्थापित किए गए इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) चार्जिंग स्टेशनों का एक राष्ट्रीय ऑनलाइन डेटाबेस विकसित करने के मकसद से 'ईवी यात्रा' पोर्टल शुरु किया है। इसके जरिए ईवी का इस्तेमाल करने वाला व्यक्ति निकटतम चार्जिंग स्टेशनों को ट्रैक कर सकता है।
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नितिन गडकरी, केंद्रीय मंत्री - फोटो : ANI
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विस्तार
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केंद्र सरकार, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए तेजी से काम कर रही है। 36 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में 26 हजार से ज्यादा ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए गए हैं। ईवी चार्जिंग स्टेशन के इस्तेमाल से 2023-24 में 1622.020 मिलियन यूनिट बिजली की खपत हुई है। देश में सबसे ज्यादा ईवी चार्जिंग स्टेशन 5879 कर्नाटक में हैं। दूसरे नंबर पर महाराष्ट्र 3842 स्टेशन हैं। उत्तर प्रदेश में 2113, दिल्ली में 1951 और तमिलनाडु में 1495 ईवी चार्जिंग स्टेशन हैं। केरल में 1288 तो वहीं राजस्थान में 1285 स्टेशन हैं। गुजरात में 1008 स्टेशन हैं। भारत में इलेक्ट्रिक यात्री कारों के विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए 15 मार्च 2024 को एसपीएमईपीसीआई को अधिसूचित किया गया था। इसके लिए आवेदकों को न्यूनतम 4150 करोड़ रुपये का निवेश करना होगा। तीसरे वर्ष के अंत में न्यूनतम 25 प्रतिशत और पांचवें वर्ष के अंत में 50 प्रतिशत डीवीए हासिल करना होगा। 

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सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन जयराम गडकरी के अनुसार, सरकार के विद्युत मंत्रालय ने देश में जनता के लिए स्थापित किए गए इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) चार्जिंग स्टेशनों का एक राष्ट्रीय ऑनलाइन डेटाबेस विकसित करने के मकसद से 'ईवी यात्रा' पोर्टल शुरु किया है। इसके जरिए ईवी का इस्तेमाल करने वाला व्यक्ति निकटतम चार्जिंग स्टेशनों को ट्रैक कर सकता है। 'ईवी यात्रा पोर्टल' www.evyatra.beeindia.gov.in पर एक्सेस किया जा सकता है। 28 अक्तूबर 2024 को अधिसूचित 'पीएम ई बस सेवा भुगतान सुरक्षा तंत्र' योजना का परिव्यय 3435.33 करोड़ रुपये है। इसका उदे्श्य सार्वजनिक परिवहन प्राधिकरणों द्वारा चूक की स्थिति में ई बस आपरेटरों को भुगतान सुरक्षा प्रदान करना है। भारत में इलेक्ट्रिक यात्री कारों के विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए 15 मार्च 2024 को एसपीएमईपीसीआई को अधिसूचित किया गया था। इसके लिए आवेदकों को न्यूनतम 4150 करोड़ रुपये का निवेश करना होगा। तीसरे वर्ष के अंत में न्यूनतम 25 प्रतिशत और पांचवें वर्ष के अंत में 50 प्रतिशत डीवीए हासिल करना होगा। 
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राष्ट्रीय इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन योजना (एनईएमएमपी) 2020 के तहत सरकार, देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने और विनिर्माण के लिए एक रोडमैप प्रदान करती है। इसका उदे्श्य राष्ट्रीय ईंधन सुरक्षा को बढ़ाना और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देना है। एनईएमएमपी 2020 के हिस्से के रूप में, सरकार ने दो चरणों में इलेक्ट्रिक/हाइब्रिड वाहनों को अपनाना, इसे बढ़ावा देने के लिए 2015 के दौरान भारत में हाईब्रिड/इलेक्ट्रिक वाहनों के तेजी से अपनाने और विनिर्माण (फेम इंडिया) योजना को लागू किया है। 

चरण 1 को 31 मार्च 2019 तक 895 करोड़ रुपये के बजट के साथ लागू किया गया था। योजना के पहले चरण में, लगभग 2.8 लाख इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए 359 करोड़ रुपये (लगभग) की कुल मांग प्रोत्साहन राशि की सहायता दी गई थी। इसके अलावा, योजना के पहले चरण में ही स्वीकृत 425 इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड बसें, लगभग 280 करोड़ रुपये के सरकारी प्रोत्साहन से देश के विभिन्न हिस्सों में तैनात की गई हैं। सरकार ने फेम इंडिया योजना के चरण 1 के तहत 43 करोड़ रुपये (लगभग) की लागत से करीब 520 चार्जिंग स्टेशन/अवसंरचना को भी मंजूरी दी गई। 

चरण 2 को 11500 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ 1 अप्रैल 2019 से मार्च 2024 तक पांच वर्षों के लिए लागू किया गया था। योजना के तहत ई-2 पहिया, ई-3 पहिया और ई-4 पहिया सहित कुल 1671606 ईवी बेचे गए हैं। इसके अलावा, भारी उद्योग मंत्रालय ने विभिन्न शहरों/राज्य परिवहन उपक्रमों  (एसटीयू)/राज्य सरकार की संस्थाओं के लिए शहर के भीतर परिचालन के लिए 6862 इलेक्ट्रिक बसें स्वीकृत की है। 6862 ई बसों में से 5140 ई बसें योजना के तहत शुरु की गई हैं। इसके अलावा, फेम 2 योजना के तहत 10985 ईवी सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन (पीसीएस) स्थापित किए जाने की परिकल्पना की गई है। 
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उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 18 मार्च 2025 तक देश भर में 26367 सार्वजनिक ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा चुके हैं। सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे के साथ 40-60 किलोमीटर के अंतराल पर मार्गस्थ सुविधाएं विकसित करने की परिकल्पना की है, जिसमें अनिवार्य सुविधाओं में से एक के रूप ईवी चार्जिंग स्टेशनों का प्रावधान है। वर्तमान वित्त वर्ष में फेम 2 योजना के तहत 60/120 किलोवाट क्षमता वाले 534 फास्ट ईवी ईवीपीसीएस शुरु किए हैं। ये ईवीपीसीएस पूरे भारत में हैं। 

पीएम इलेक्ट्रिक ड्राइव रीवोल्यूशन इन इनोवेटिव व्हीकल एन्हांसमेंट (पीएम ई ड्राइव) योजना को 29 सितंबर 2024 को अधिसूचित किया गया था। यह 31 मार्च 2026 को समाप्त होने वाली दो साल की योजना है। इसका मकसद ई 2 पहिया, ई 3 पहिया, ई ट्रक, ई बस, ई एंबुलेंस, ईवी सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन सहित इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए सहायता और परीक्षण एजेंसियों का उन्नयन करना है। 

इसके अलावा पीएम ई ड्राइव योजना में विभिन्न श्रेणियों के इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए पर्याप्त सार्वजनिक चार्जिंग अवसंरचना की स्थापना के लिए 2000 करोड़ रुपये की सहायता की परिकल्पना की गई है। सरकार ने 23 सितंबर 2021 को ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट उद्योग के लिए 25938 करोड़ रुपये के बजटीय परिव्यय के साथ उन्नत ऑटोमोटिव प्रौद्योगिकी उत्पादों के लिए भारत की विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाने के लिए इस योजना को अनुमोदित किया है। 

यह योजना न्यूनतम 50 प्रतिशत घरेलू मूल्य संवर्धन 'डीवीए' के साथ एएटी उत्पादों के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन का प्रस्ताव करती है। सरकार ने 12 मई 2021 को 18100 करोड़ रुपये के बजटीय परिव्यय से देश में एडवांस केमिस्ट्री सेल के निर्माण के लिए पीएलआई योजना को मंजूरी दी है। इस योजना का मकसद, 50 गीगावाट एसीसी बैटरियों के लिए प्रतिस्पर्धी घरेलू विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना है। 

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