केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बृहस्पतिवार को कहा कि बैंकों ने राजमार्गों के निर्माण के लिए 1.30 लाख करोड़ रुपये के वित्तपोषण के प्रति आश्वस्त किया है। राजमार्ग मंत्री ने कहा कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के दौरान 3.85 लाख करोड़ रुपये की लागत वाली 403 परियोजनाएं ठप हुईं। मई 2014 में सत्तासीन होने के बाद मौजूदा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार ने तीन लाख करोड़ रुपये की लागत वाली ठप परियोजनाओं को पटरी पर लाया।
गडकरी ने कहा कि उन्होंने सड़क क्षेत्र के वित्तपोषण को लेकर बैंकों, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर तथा केंद्रीय वित्त मंत्री के साथ बैठकें कीं। गडकरी ने लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान कहा कि बैंकों ने लिखित में मुझे बताया है कि वे ईपीसी (इंजीनियरिंग प्रोक्योरमेंट कंस्ट्रक्शन) मोड में बनने वाली राजमार्ग परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए 1.30 लाख करोड़ रुपये देने के लिए तैयार हैं।
उन्होंने कहा कि मई 2014 तक देश में राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई 91,000 किलोमीटर थी, जो वाहनों की बढ़ती संख्या से निपटने के लिए अपर्याप्त थी, क्योंकि वाहन उद्योग में सालाना 22 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। मौजूदा सरकार ने इस लंबाई को दोगुना बढ़ाकर 1.80 लाख किलोमीटर कर दिया। इनमें से 1.30 लाख किलोमीटर केंद्र सरकार के अधीन तथा बाकी 50,000 किलोमीटर प्रिंसिपल नेशनल हाईवे के अधीन है, जिसका रख-रखाव राज्यों द्वारा किया जाना है।
अप्रैल-जून अवधि में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को 87,663 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया, जिनमें से 20,743 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।