नितिन गडकरी ने मोदी सरकार- 2 में केंद्रीय मंत्री पद की शपथ ली है। वह पहली मोदी सरकार में सबसे सफल मंत्री के तौर पर जाने जाते हैं। उनकी छवि बेहद साफ-सुथरी है। वह राजनेता होने के साथ ही उद्यमी भी हैं। गडकरी साल 2010 से लेकर 2013 तक भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे। साल 2004 में गडकरी को महाराष्ट्र भाजपा अध्यक्ष बनाया गया। संघ के बेहद करीबी माने जाने वाले गडकरी नागपुर से हैं। मोदी सरकार-1 में उन्हें सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री की जिम्मेदारी दी गई थी।आइए नितिन गडकरी के राजनीतिक करियर पर एक नजर डालते हैं..
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से शुरू हुई छात्र राजनीति
27 मई 1957 को महाराष्ट्र के नागपुर में पैदा हुए नितिन गडकरी का बचपन गरीबी में बीता। उन्होंने महाराष्ट्र से ही एमकॉम और फिर एलएलबी किया। गडकरी ने बिजनेस मैनेजमेंट में डिप्लोमा भी किया हुआ है। उनकी पत्नी का नाम कंचन गडकरी है। नितिन गडकरी के तीन बच्चे हैं- निखिल, सारंग और केतकी। राजनीति में गडकरी का पदार्पण छोटी उम्र में ही हो गया था। भारतीय जनता पार्टी के छात्र विंग अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़कर गडकरी स्टूडेंट्स पॉलिटिक्स में सक्रिय हुए। उन्होंने ही एबीवीपी का 28वां राष्ट्रीय कन्वेंशन आयोजित किया। छात्र राजनीति से ही गडकरी को काफी तेज-तर्रार नेता माना जाता है।
24 साल की उम्र में बनें भाजयुमो के अध्यक्ष
नितिन गडकरी 24 साल की उम्र में भारतीय जनता युवा मोर्चा के अध्यक्ष बनें। जब गडकरी को भाजपा के नागपुर शहर का सचिव बनाया गया उन्होंने पार्टी के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 32 साल की उम्र में गडकरी नागपुर शहर के एमएलसी बनें। वह लगातार 1990, 1996, 2002 और 2008 तक एमएलसी रहे। 1992 में नागपुर निगम चुनाव जीतने के बाद ही असल मायने में गडकरी का राजनीतिक करियर शुरू हुआ।
42 साल की उम्र में गडकरी महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के नेता बनें। उन्हें भारत में पहला बायो-डिजल पंप लाने का श्रेय जाता है। 1979 में गडकरी महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र के सचिव रहे। 1985 में गडकरी नागपुर शहर के सचिव नियुक्त हुए। गडकरी 1995 से 1999 तक एमएसआरडीसी के संस्थापक चेयरमैन रहे। पिछले सरकार में नितिन गडकरी ने 26 मई को केंद्रीय मंत्री की शपथ ली।