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Nitin Gadkari: 'सिर्फ सरकार-भगवान के भरोसे रहने से नहीं बदलेगा देश', गडकरी ने लोगों से की जनभागीदारी की अपील

Mon, 18 May 2026 07:35 AM IST
अमन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागपुर

सार

नितिन गडकरी ने नागपुर में कहा कि केवल सरकार और भगवान के भरोसे रहने से देश नहीं बदलेगा। उन्होंने जल संरक्षण के लिए जनभागीदारी और नई तकनीक पर जोर दिया। गडकरी ने विदर्भ में किसानों की स्थिति सुधारने के लिए सामाजिक संस्थाओं के प्रयासों की सराहना की।
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नितिन गडकरी, केंद्रीय मंत्री - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नागपुर में आयोजित 'जल संवाद' सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने पर्यावरण की रक्षा और देश की तरक्की के लिए जनभागीदारी पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हर काम के लिए सरकार पर निर्भर रहना ठीक नहीं है। गडकरी ने समाज की एक बड़ी कमजोरी की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि लोग सरकार और भगवान पर बहुत ज्यादा भरोसा करते हैं। उनके अनुसार, अगर इन दोनों ने सही ढंग से काम किया होता, तो देश की स्थिति बहुत पहले ही बदल गई होती।
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क्या बोले केंद्रीय मंत्री?
गडकरी ने कहा कि देश को बदलने के लिए हमें हर व्यक्ति और समाज को जगाना होगा। जब लोग मिलकर काम करेंगे, तभी बदलाव आएगा। यह सम्मेलन 'पूर्ति सिंचन समृद्धि कल्याणकारी संस्था' के 25 साल पूरे होने पर आयोजित किया गया था। यह संस्था महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में जल संरक्षण के लिए काम कर रही है। इस कार्यक्रम में देश भर के जल संरक्षण विशेषज्ञ और कार्यकर्ता शामिल हुए।

संस्था के कामों की तारीफ की
गडकरी ने संस्था के कामों की तारीफ की। उन्होंने बताया कि विदर्भ के कई गांवों में इस संस्था के काम का बहुत अच्छा असर हुआ है। वहां सिंचाई की सुविधा बढ़ी है और पुराने कुओं को फिर से जीवित किया गया है। इससे जमीन के नीचे पानी का स्तर बढ़ा है और किसानों ने सोलर पंप लगाए हैं। इन प्रयासों से किसानों का जीवन बेहतर हुआ है। वे कर्ज से मुक्त होने लगे हैं और किसानों की आत्महत्या के मामलों में भी कमी आई है।
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पर्यावरण और जल संरक्षण पर क्या बोले मंत्री
पर्यावरण की रक्षा और जल संरक्षण पर बात करते हुए गडकरी ने नए और परखे हुए मॉडलों को अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि हमें सरकार के भरोसे बैठे बिना खुद नए तरीके खोजने होंगे। गडकरी ने साफ शब्दों में कहा कि सरकार के पास इतने बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए पर्याप्त बजट नहीं है। इसलिए हमें तकनीक का सहारा लेना होगा।
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सामाजिक पहलों के माध्यम से आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, नवाचार, उद्यमिता, विज्ञान, तकनीक, कौशल और सफल प्रयोगों का मेल ही 'ज्ञान' है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस ज्ञान को धन में बदलना ही भविष्य है। उन्होंने सामाजिक प्रयासों से आत्मनिर्भर बनने की बात कही। गडकरी ने अंत में कहा कि संस्था के 25 वर्षों के सफर ने यह साबित कर दिया है कि जनभागीदारी से सब कुछ मुमकिन है।
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