अगर आज से कुछ साल पहले हुई सबरीमाला भगदड़, राजाहमुंदड़ी भगदड़, दतिया भगदड़ और पिछले साल सितंबर में मुंबई के एलफिनस्टोन रेलवे स्टेशन के पास मची भगदड़ में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल होता, तो हजारों लोगों की जानें न जातीं। हाल ही में नीति आयोग ने कहा है कि ऐसे आयोजन या समारोह जहां हजारों-लाखों की संख्या में लोग एकत्र होते हैं, वहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का व्यापक इस्तेमाल किया जा सकता है।
ऐसे तमाम हादसे हैं, जहां ठीक से भीड़ प्रबंधन न होने की वजह से हजारों लोग जान गंवा चुके हैं। खासतौर पर मेलों में भगदड़ के चलते हजारों लोगों की मौत हो चुकी है। हाल ही में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर जारी व्हाइट पेपर में नीति आयोग ने 2016 के कुंभ मेला का उदाहरण देते हुए कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल से भीड़ प्रबंधन अच्छे से किया जा सकता है। नीति आयोग के मुताबिक 2016 के कुंभ मेले में जहां कई आर्गेनाइजेशंस के विशेषज्ञों ने बड़ी मात्रा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से मिले डाटा को एनालाइज करके श्रद्धालुओं की भीड़ को मैनेज किया और लोगों की भीड़ का सटीक अनुमान लगाया, वह वाकई में देश में इस तकनीक के इस्तेमाल बेहतरीन उदाहरण है।
अपने व्हाइट पेपर में भीड़ प्रबंधन के इस्तेमाल में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रयोग पर नीति आयोग का कहना है कि हालिया समय में जहां काफी संख्या में लोग आते हैं ऐसे में भीड़ को मैनेज करने में, इमरजेंसी या आपदाओं में इस तकनीक का बेहतर इस्तेमाल हुआ है। नीति आयोग के मुताबिक सिंगापुर की आजादी के 50 साल पूरे होने पर जश्न के दौरान एसेंचर कंपनी ने पर्यटकों की भीड़ और उनके व्यवहार के आंकड़े जुटा कर और उस डेटा को एनालिसिस करके ऐसा समाधान खोजा, जिससे भगदड़ से होने वाले हादसों से बचा जा सके। इस सिस्टम से उपस्थित लोगों की गतिविधि, भीड़ का आकार और अनुमान 85 फीसदी तक सटीक अंदाजा लगाया जा सका।
115 पेजों के व्हाइट पेपर में नीति आयोग ने कई क्षेत्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रयोग की सिफारिश की है। नीति आयोग के मुताबिक शिक्षा, स्वास्थ्य, स्मार्ट सिटीज, कृषि, स्मार्ट मोबिलिटी और परिवहन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है। अपने पेपर में नीति आयोग ने लिखा है कि सूचना प्रौद्योगिकी के सहयोग से देश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस लीडरशिप को विकसित किया जा रहा है और उस स्तर पर पहुंचाने की कोशिश की जा रही है, जहां भारत दुनिया का 40 फीसदी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेवा प्रोवाइडर बन सके।
आयोग का कहना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के कई क्षेत्रों में गहन प्रयोग से कई समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। उदाहरण के लिए इसके इस्तेमाल से न केवल स्वास्थ्य का बेहतर ध्यान रखा जा सकता है, साथ ही बीमारियों का समय पर पता लगाया जा सकता है। आयोग ने अपने जारी पेपर में सरकार के हस्तक्षेप को जरूरत बताते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के रिसर्च सेंटर्स बनाने का सुझाव दिया है। इसके अलावा आयोग ने सुझाव दिया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर नेशनल फेलोशिप भी दी जाएं।