देश में फार्मा, दुलर्भ खनिज व एआई पर सबसे ज्यादा शोध किए जा रहे हैं। यूपी पूरे देश में तीसरे नंबर पर है। इंडिया एसएंडटी स्कोरबोर्ड लांच किया गया है। इसके जरिये राज्य शोध व अनुसंधान के क्षेत्र में अपनी स्थिति जान सकेंगे।
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देश में सबसे ज्यादा शोध का काम फार्मा, दुलर्भ खनिज व एआई क्षेत्र में हो रहा है। यही नहीं सेमीकंडक्टर जैसे नए क्षेत्र से लेकर परंपरागत पेशे खेती तक में नए नए शोध हो रहे हैं। इस मामले में तमिलनाडु नंबर एक पर है जबकि महाराष्ट्र दूसरे व यूपी तीसरे स्थान पर है।
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वित्त वर्ष 2024-25 मेंं कुल रिसर्च प्रकाशन 223,005 हुए हैं जबकि 62,934 पेटेंट आवेदन दाखिल हो चुके हैं। इनमें सबसे ज्यादा 196,812 शोध प्रकाशन विश्वविद्यालयों व तकनीकी संस्थानों के जरिए हुए हैं, जबकि सरकारी प्रयोगशालाओं के जरिए 39,145 व उद्योगों के जरिए 16,521 शोध प्रकाशन हुए हैं। खास बात यह कि यूपी में 2,272 प्रकाशन तो एआई व साइबर सिस्टम पर आए हैं। फार्मा सेक्टर व स्वास्थ्य क्षेत्र में यह आंकड़ा 7,518 का है।
यह नतीजे इंडिया एसएंडटी स्कोरबोर्ड पर आए हैं। इसका मंगलवार को ही शुभारंभ किया गया। नीति आयोग की एक प्रमुख पहल के रूप में विकसित यह स्कोरबोर्ड एक इंटरैक्टिव प्लेटफॉर्म है। यह भारतीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिदृश्य का एक एकीकृत दृश्य प्रदान करता है। इसके जरिए राज्य अपनी विशेषज्ञता और केंद्रित कार्रवाई के क्षेत्रों की पहचान कर सकेंगे। इस इंटरैक्टिव डैशबोर्ड पर इकोसिस्टम, प्रकाशन और पेटेंट डेटा को वर्षों के रुझानों के साथ पेश किया गया है। इससे राज्य समय के साथ अपनी प्रगति को ट्रैक कर सकेंगे।
राज्यवार शोध पत्रों की संख्या 2.23 लाख से अधिक, पेटेंट के आवेदन 62 हजार से अधिक:
वित्त वर्ष 2024-25 में शोध पत्र मामले में शीर्ष 10 राज्य
1
राज्य
संख्या
2
तमिलनाडु
44,611
3
उत्तर प्रदेश
29,298
4
महाराष्ट्र
28,947
5
कर्नाटक
27,970
6
दिल्ली
24,417
7
पश्चिम बंगाल
18,280
8
पंजाब
15,565
9
तेलंगाना
15,253
10
उत्तराखंड
11,169
11
गुजरात
10,503
स्कोरबोर्ड में उच्च शिक्षण संस्थानों, अनुसंधान एवं विकास संस्थानों, डीप-टेक स्टार्टअप्स और इनक्यूबेटर्स सहित एसएंडटी इकोसिस्टम के डेटा के साथ-साथ शोध प्रकाशनों और पेटेंट जैसे एसएंडटी आउटपुट के डेटा को समाहित किया गया है। इन शोध के लिए केंद्र, राज्य सरकार के अलावा निजी सेक्टर भी फंड उपलब्ध करवाता है।
सेक्टरवार शोध पत्रों की स्थिति, दो वर्षों की तुलना में साफ दिखा अंतर
2023-24 की तुलना में सभी क्षेत्रों में बढ़ा है शोध करने का रुझान