रिलायंस इंडस्ट्रीज की कार्यकारी निदेशक और रिलायंस फाउंडेशन की अध्यक्ष नीता अंबानी के बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में विजिटिंग प्रोफेसर बनने की रिपोर्ट को उनके प्रवक्ता ने फर्जी करार दिया है। रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के प्रवक्ता ने बुधवार को कहा कि नीता अंबानी को बीएचयू की ओर से विजिटिंग प्रोफेसर बनाने का कोई प्रस्ताव नहीं मिला है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के प्रवक्ता ने कहा कि बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में विजिटिंग प्रोफेसर बनाई जाने की खबरें फर्जी हैं। नीता अंबानी को विश्वविद्यालय से कोई प्रस्ताव नहीं मिला है।
हाल ही में खबरें आईं थीं कि बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के सामाजिक विज्ञान संकाय की ओर से नीता अंबानी को विजिटिंग प्रोफेसर बनाने का प्रस्ता भेजा गया है। रिलायंस इंडस्ट्रीज के मालिक मुकेश अंबानी की पत्नी नीता अंबानी ने मुंबई विश्वविद्यालय से बीकॉम किया है और उन्हें वर्ष 2014 में रिलायंस इंडस्ट्रीज का कार्यकारी निदेशक बनाया गया। साल 2010 में उन्होंने रिलायंस फाउंडेशन का गठन किया था। माना जा रहा था कि उनकी एक सफल महिला उद्यमी होने की छवि की वजह यह प्रस्ताव दिया गया है।
छात्र कर रहे थे विरोध
नीता को बीएचयू का विजिटिंग प्रोफेसर बनाए जाने की खबरें आने के बाद विश्वविद्यालय के छात्रों ने विरोध शुरू कर दिया। छात्रों ने कुलपति पर बीएचयू को उद्योगपतियों के इशारे पर चलाने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की थी।
विश्वविद्यालय ने कहा था , नीता ने मौखिक तौर पर स्वीकार प्रस्ताव
वहीं, सामाजिक विज्ञान संकाय के डीन प्रोफेसर कौशल किशोर मिश्रा ने बताया था कि नीता अंबानी ने मौखिक तौर पर प्रस्ताव स्वीकारा भी है। वैसी भी मालवीय जी के समय से परंपरा रही है कि बीएचयू से बड़े उद्योगपतियों को जोड़ा गया है। उसी कड़ी में अंबानी को जोड़ने की कोशिश हो रही है। उनके जुड़ने से महिलाओं को रोजगार के कई साधन उपलब्ध होंगे।