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Union Budget 2026: 'देश की आर्थिक ताकत को समझें', चीन का जिक्र कर निर्मला सीतारमण ने विपक्ष पर साधा निशाना

Sun, 01 Feb 2026 11:07 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Nirmala Sitharaman on Youth Dialogue Budget 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने युवा संवाद कार्यक्रम में कहा कि बजट सिर्फ टैक्स नहीं बल्कि योजनाओं और प्राथमिकताओं का पूरा रोडमैप है। उन्होंने महिलाओं की कार्यभागीदारी, रक्षा खर्च, किसान हित, कोविड काल के कर्ज और वित्तीय अनुशासन पर विस्तार से बात की। साथ ही उन्होंने विपक्ष पर भी साधा। आइए जानते हैं, उन्होंने क्या कुछ कहा।

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निर्मला सीतारमण, वित्त मंत्री - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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नई दिल्ली में बजट 2026 को लेकर आयोजित युवा संवाद कार्यक्रम में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि बजट को केवल टैक्स बढ़ाने या घटाने के नजरिए से नहीं देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि बजट आम लोगों के जीवन से जुड़ी योजनाओं, सुरक्षा, रोजगार, महिलाओं और किसानों के हितों से जुड़ा व्यापक दस्तावेज होता है। हेडिंग के अनुरूप उन्होंने साफ कहा कि बजट सरकार की प्राथमिकताओं और देश की दिशा का रोडमैप दिखाता है।
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वहीं, विपक्ष पर भी निशाना साधते हुए कहा कि बजट को केवल राजनीतिक नजरिए से नहीं, बल्कि तथ्यों और प्रावधानों के आधार पर परखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अक्सर विपक्ष हर बजट की आलोचना एक तय रुख के साथ करता है, जबकि जरूरी है कि यह देखा जाए कि योजनाओं से गरीब, मध्यम वर्ग, किसान और युवाओं को कितना लाभ मिलेगा। उन्होंने संकेत दिया कि बजट की पारदर्शिता पहले से ज्यादा है और बिना पूरी जानकारी के उसे खारिज करना उचित नहीं है।

बजट की समझ पर जोर
वित्त मंत्री ने कहा कि लोगों को देखना चाहिए कि बजट की योजनाएं उनके जीवन से जुड़े मुद्दों को कितना संबोधित करती हैं। टैक्स नीति में सरकार की निरंतरता भी अहम है। हर साल बदलाव हो रहा है या स्थिरता है, यह देखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि अब बजट पहले की तुलना में ज्यादा पारदर्शी है और हर वर्ग के लिए योजनाओं का स्पष्ट उल्लेख होता है। अगर किसी वर्ग को लाभ नहीं मिल रहा तो उस पर भी खुलकर चर्चा होनी चाहिए।
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वित्त मंत्री ने आगे कहा कि विपक्ष को भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत को समझना चाहिए। उन्होंने आईएमएफ के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि वैश्विक जीडीपी ग्रोथ में चीन की हिस्सेदारी 26 प्रतिशत और भारत की 17 प्रतिशत है, यानी दोनों मिलकर 43 प्रतिशत वैश्विक वृद्धि दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत अब दुनिया की बड़ी आर्थिक ताकत बन चुका है और विपक्ष को इस उपलब्धि को स्वीकार कर देश की क्षमता पर भरोसा दिखाना चाहिए।



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महिलाओं की भागीदारी पर क्या बोलीं वित्त मंत्री?
  • महिलाओं का कार्यबल में आना देश की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है।
  • काम करना या न करना हर महिला का व्यक्तिगत फैसला है।
  • जो महिलाएं काम करना चाहती हैं, उनके लिए अनुकूल माहौल बनाना जरूरी है।
  • सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है कि सुरक्षित और सहयोगी कार्यस्थल उपलब्ध हो।
  • श्रम कानून महिलाओं के अनुकूल होने चाहिए।
  • नियोक्ताओं की सोच और कार्यस्थल का व्यवहार सहयोगी होना चाहिए।
  • कार्यस्थल पर आपसी संबंध और वातावरण सकारात्मक होना जरूरी है।
  • मातृत्व अवकाश को कुछ हफ्तों से बढ़ाकर छह महीने किया गया है।
  • मातृत्व अवकाश बढ़ाने का फैसला कामकाजी महिलाओं को सहूलियत देने के लिए लिया गया।

रक्षा, किसान और संसाधनों का संतुलन
उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता। पिछले वर्षों में रक्षा पर किए गए खर्च का फायदा अभियानों में दिखा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पहले सैनिकों के पास जरूरी सुरक्षा उपकरण तक नहीं होते थे, लेकिन अब प्राथमिकताएं बदली हैं। साथ ही किसानों के उत्पादन, खरीद और उचित मूल्य का संतुलन भी जरूरी है। बाजार मूल्य और उपभोक्ता हित के बीच संतुलन के लिए सब्सिडी जैसे उपाय करने पड़ते हैं। यही संतुलन बनाना वित्त मंत्री की सबसे बड़ी चुनौती होता है।

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कोविड काल और कर्ज पर स्थिति
वित्त मंत्री ने कहा कि कोविड जैसे संकट में सरकार को बिना झिझक कर्ज लेकर काम करना पड़ा, क्योंकि लोगों की जान बचाना पहली प्राथमिकता थी। उस समय वैक्सीन पर खर्च किया गया और नागरिकों पर अलग से टैक्स नहीं लगाया गया। उन्होंने कहा कि संकट के बाद जब अर्थव्यवस्था पटरी पर लौटी तो कर्ज कम करने और वित्तीय अनुशासन पर जोर दिया गया, ताकि आने वाले समय में नागरिकों पर बोझ न बढ़े।

उन्होंने बताया कि इस बार बजट के बाद मीडिया इंटरव्यू के बजाय छात्रों और युवाओं से सीधा संवाद करने का फैसला किया गया। विश्वविद्यालयों के छात्रों को बुलाकर बजट पर बातचीत की गई। उन्होंने युवाओं से पूछा कि संसद में बजट सुनने का उनका अनुभव कैसा रहा। उन्होंने कहा कि देश को बेहतर भारत की दिशा में ले जाने के लिए नई पीढ़ी की भागीदारी और समझ जरूरी है।

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