केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को अपने बजट भाषण में 'देशमांते मट्टी कादोई, देशमांते मनुशुलोई' का जिक्र किया। यह पंक्ति प्रख्यात लेखक और स्वतंत्रता-पूर्व युग के दौरान तेलुगु साहित्य के ज्ञाता गुरजाड अप्पाराव की है। इसका मतलब है कि एक देश सिर्फ जमीन नहीं है, बल्कि उसके लोग हैं।
1862 में आंध्र प्रदेश में जन्मे गुरजाड अप्पाराव ने प्रसिद्ध नाटक ‘कन्या सुल्कम’ लिखा, जो उन दिनों बाल विवाह की बुरी परंपराओं पर एक उल्लेखनीय नाटक था। उन्होंने विजयनगरम के एम.आर. कॉलेज में व्याख्याता के रूप में काम किया। उनकी उत्कृष्ट कृति ‘कन्याशुल्कम’ पर 1955 में एक फिल्म बनाई गई थी, जिसमें आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एन टी रामा राव ने मुख्य भूमिका निभाई थी। विजयनगरम जिले की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, उनकी मृत्यु 30 नवंबर, 1915 को हुई थी और जिस घर में वे रहते थे वह विजयनगरम किले के बगल में स्थित है।
विपक्ष ने किया बर्हिगमन
इस बीच विपक्ष के सदस्यों ने लोकसभा में बजट भाषण पढ़े जाने के दौरान कुछ समय के लिए सदन से वॉकआउट किया। वे कुंभ हादसे को लेकर सरकार के बयान की मांग कर रहे थे। लोकसभा की बैठक पूर्वाह्न 11 बजे शुरू होते ही विपक्षी सदस्यों ने 29 जनवरी को हुई भगदड़ को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी, जिसमें 30 लोगों की मौत हो गई थी।
नारेबाजी के बीच भाषण पढ़ना शुरू किया
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इसी नारेबाजी के बीच ही अपना बजट भाषण पढ़ना शुरू किया। नारेबाजी करीब पांच मिनट तक चली, जिसके बाद विपक्षी सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन किया। हालांकि, कुछ ही समय बाद वे सब सदन में वापस आ गए। इस बीच वित्त मंत्री ने अपना बजट भाषण जारी रखा।
वॉकआउट में तृणमूल कांग्रेस के सदस्य शामिल नहीं
बहिर्गमन करने वाले सदस्यों में तृणमूल कांग्रेस के सदस्य शामिल नहीं थे। वित्त मंत्री सीतारमण के बजट भाषण पूरा होने के बाद भी विपक्षी सदस्यों ने प्रयागराज कुंभ में हुई भगदड़ पर सरकार से बयान देने की मांग की।