केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को संस्कृत को अधिक रोचक और सहज बनाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता के इस्तेमाल की वकालत की। उन्होंने कहा कि तकनीक का इस्तेमाल केवल व्याकरण सिखाने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इससे विद्यार्थियों को संस्कृत के शास्त्रीय साहित्य की समृद्धि और सुंदरता समझने में भी मदद मिलनी चाहिए। सीतारमण ने मद्रास संस्कृत कॉलेज में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित बड़े भाषा मॉडल 'संस्कृत हेरिटेज मॉडल' के शुभारंभ के दौरान यह बात कही।
उन्होंने कहा कि विदेशों में आधुनिक भाषा शिक्षण की सफलता की एक वजह यह है कि वहां विद्यार्थियों को केवल कड़े नियमों तक सीमित रखने के बजाय महान साहित्य के माध्यम से भाषा से जोड़ा जाता है। वित्त मंत्री ने कहा, 'भाषा इतनी आकर्षक होनी चाहिए कि लोग उसे सीखना चाहें। इसमें इस तरह के मसाले की जरूरत होती है।' उन्होंने भाषा सिखाने वाले ऐसे साधनों से बचने की बात कही, जो बेहद नीरस हों।
'कालिदास पर अंग्रेजी या भारतीय भाषाओं में व्यापक अध्ययन कम'
वित्त मंत्री ने भारतीय शास्त्रीय साहित्य के आलोचनात्मक और सराहनात्मक अध्ययन की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने संस्कृत के महान कवि कालिदास पर उपलब्ध अध्ययन की तुलना विलियम शेक्सपियर के साहित्य पर उपलब्ध व्यापक सामग्री से की। उन्होंने कहा, 'आप 'रोमियो एंड जूलियट' या मेरे पसंदीदा नाटक 'जूलियस सीजर' को ले लीजिए। मैं आपको कम से कम तीन किताबें दे सकती हूं। इन सभी में बताया जाएगा कि शेक्सपियर ने कोई खास विषय क्यों चुना।'
उन्होंने कहा कि कालिदास की रचनात्मक क्षमता और साहित्यिक कौशल को समझाने वाली ऐसी व्यापक सामग्री अंग्रेजी या आधुनिक भारतीय भाषाओं में आसानी से उपलब्ध नहीं है। सीतारमण ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता बड़े पैमाने पर शास्त्रीय ग्रंथों का विश्लेषण कर इस कमी को दूर करने में मदद कर सकती है।
उन्होंने कहा, 'अगर मेरे पास ऐसी शानदार मशीन हो, जो पूरी तरह जानती हो कि किसी वाक्य का व्याकरण सही है या नहीं और यह समझा सकती हो कि संधि और समास इस तरह क्यों होंगे। वह मुझे सौ श्रेष्ठ उपमाएं भी दे सकती है... किसी विद्वान के पास असीमित समय नहीं होता, जबकि यह मशीन मुझे बिना थके उतना समय और सामग्री दे सकती है, जितना मैं इसके बारे में जानने के लिए देना चाहूं।'
'दुनिया में संस्कृत की ऐतिहासिक छाप'
वित्त मंत्री ने कहा कि भारत की वैश्विक सांस्कृतिक पहचान में संस्कृत की ऐतिहासिक भूमिका रही है। विदेश यात्राओं के अनुभव साझा करते हुए उन्होंने क्रोएशिया का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि क्रोएशिया की स्थानीय भाषा में आज भी एक हजार से अधिक संस्कृत शब्द इस्तेमाल किए जाते हैं। उनके मुताबिक, इससे वहां के लोगों में अपनी प्राचीन विरासत को लेकर गर्व की भावना दिखाई देती है।
उन्होंने फिलीपींस, वियतनाम के चाम साम्राज्य, मध्य एशिया और काकेशस क्षेत्र में प्राचीन भारतीय भाषाओं के भंडार और संस्कृत से जुड़े प्रमाणों का भी उल्लेख किया। सीतारमण ने तकनीक विशेषज्ञों से दुनिया भर में बिखरी ऐतिहासिक पांडुलिपियों, ताड़पत्रों और शिलालेखों को खोजने और उनका सूचकांक तैयार करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित साधनों का इस्तेमाल करने का आग्रह किया।
किसने बनाया संस्कृत हेरिटेज मॉडल?
तमिलनाडु से जुड़े प्राचीन लीडेन ताम्रपत्रों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इनमें नागपट्टिनम के पास एक बौद्ध विहार को दिए गए अनुदानों का विवरण दर्ज था। उन्होंने कहा कि दुनिया भर के अभिलेखागार में तकनीक की मदद से खोज की जानी चाहिए, ताकि शोधकर्ता भारतीय भाषाओं के भौगोलिक विस्तार का मानचित्र तैयार कर सकें।
उन्होंने कहा, 'हमारी सबसे बड़ी ताकत, जो हमारे संस्कारों में है, उसे खोना नहीं चाहिए। यह परंपरा ऐसी तकनीक के साथ आगे बढ़नी चाहिए, जो इसे 21वीं और 22वीं सदी तथा उसके बाद भी आगे ले जा सके।' उन्होंने ऐसी पहलों को अपना पूरा समर्थन देने की बात कही। 'संस्कृत हेरिटेज मॉडल' को प्रौद्योगिकी कंपनी आर्टिकुल8 एआई ने विकसित किया है। कंपनी का नेतृत्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी अरुण के. सुब्रमणियन, प्रबंध निदेशक अनंतनारायणन शण्मुगम और मद्रास संस्कृत कॉलेज के न्यासी एवं निदेशक श्री रमेश महालिंगम कर रहे हैं।