बलिया की बेटी पर बन रही फिल्म ‘नेवर अगेन निर्भया’
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दिल्ली में करीब साढ़े चार साल पहले दरिंदों की शिकार निर्भया को सुप्रीम इंसाफ मिला लेकिन निर्भया फंड खर्च करने में सरकारें और संस्थाएं फिसड्डी साबित हुईं। निर्भया कांड के बाद देश व्यापी महिलाओं की सुरक्षा के लिए अभियान चलाया गया और 3000 करोड़ रुपये का एक निर्भया फंड बनाया गया। लेकिन विंडबना ये कि इन चार सालों में केवल 400 करोड़ रुपए ही खर्च किए गए।
बता दें कि केन्द्र सरकार ने 2013 के आम बजट में निर्भया कोष घोषित किया था, जिसमें 1,000 करोड़ रुपये प्रति वर्ष खर्च करने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन अभी तक इस फंड में से केवल 400 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।
मुंबई मिरर की खबर के मुताबिक, महिला और बाल विकास मंत्रालय ने जनवरी 2017 में बताया, "निर्भय निधि के तहत, 21 प्रस्तावों के लिए 2195.97 करोड़ रुपये अब तक प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 2187.47 करोड़ रुपये की 16 प्रपोजल को एक उच्चस्तरीय कमिटी ने मंजूरी दे दी है।"
निर्भया निधि का सबसे महत्वपूर्ण घटक है, सेंट्रल विलीटी कॉम्पेन्सेशन फंड जिसमें 200 करोड़ रुपये का संग्रह है। इस फंड के तहत बलात्कार पीड़ितों की मदद की जाती है। रेप या ऐसिड अटैक की पीड़िताओं को 3 लाख रुपये का मुआवजा देने का प्रावधान है। इसमें से 50 फीसदी भाग राज्य सरकारें वहन करेंगी लेकिन राज्य सरकारें अपना भाग नहीं दे रही हैं। राज्य सरकारों का कहना है कि उनके पास फंड की कमी है। इसके अलावा मंत्रालय ने वन स्टॉप सेंटर, वीमेन हेल्पलाइन और महिला पुलिस वॉलंटियर की योजनाएं शुरू की गई थीं।