सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया के चार दोषियों में से एक अक्षय कुमार सिंह की पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया है। इसके साथ ही निर्भया के हत्यारों और फांसी के फंदे के बीच की दूरी भी थोड़ी कम हो गई है। हालांकि इन दोषियों को फांसी के फंदे पर झूलते देखने के लिए थोड़ा इंतजार और करना होगा। कानूनी प्रक्रिया में अभी ऐसे कुछ चरण बाकी हैं, जिनका फायदा उठाकर बचाव पक्ष सजा ए मौत को थोड़ा लटका सकता है।
यह चाल चलने की फिराक में बचाव पक्ष
- अक्षय की पुनर्विचार याचिका दायर करने वाला वकील एपी सिंह इस मामले को लटकाने की कोशिश में है
- इसके लिए वह निर्भया के दोस्त द्वारा मीडिया में बयान देने के मामले को इस्तेमाल कर सकता है
- वकील का दावा है कि नए तथ्य सामने आने के बाद नए सिरे से केस की सुनवाई होनी चाहिए।
17 मामलों को ढाल बनाने की कोशिश
- बचाव पक्ष चारों दोषियों को फांसी से बचाने के लिए दुष्कर्म के 17 मामलों का इस्तेमाल कर सकता है
- ये 17 मामले ऐसे हैं, जिनमें सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया
- बचाव पक्ष का वकील 2017 के बाद हुए इन मामलों को अदालत के सामने रखेगा
बाकी तीन दोषियों की पुनर्विचार याचिका अभी बाकी
- सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ अभी तक सिर्फ अक्षय ने ही पुनर्विचार याचिका दायर की है
- बाकी तीन दोषियों की पुनर्विचार याचिका दाखिल होना अभी बाकी है
- बचाव पक्ष मामले को लटकाने के लिए इसका भी इस्तेमाल कर सकता है