इस बीच, दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट ने बृहस्पतिवार को दोषी पवन के लिए रावी काजी को नियुक्त किया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धर्मेंद्र राणा ने यह फैसला तब किया, जब पवन ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से कानूनी सहायता देने का प्रस्ताव ठुकरा दिया। कोर्ट ने बुधवार को ही प्रक्रिया में देरी पर भड़कते हुए पवन को एक वकील देने का प्रस्ताव दिया था। कोर्ट ने इसके साथ ही दोषियों की फांसी के लिए नया डेथ वारंट जारी करने अर्जियों पर सुनवाई सोमवार तक के लिए टाल दी।
दिखावे के लिए नहीं होती कानूनी सहायता: कोर्ट
निर्भया मामले में दिल्ली की पटियाला हाउस अदालत ने बृहस्पतिवार को दोषियों को फांसी देने के लिए नया डेथ वारंट जारी करने की अर्जी पर सुनवाई सोमवार दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी। दिल्ली सरकार और निर्भया के माता-पिता की अर्जी पर की जा रही सुनवाई में कोर्ट ने एक दोषी पवन गुप्ता के लिए एक वकील रवि काजी को नियुक्त कर दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि कानूनी सहायता महज दिखावा के लिए नहीं हो सकती। चारों दोषियों में से सिर्फ पवन के पास ही सुधारात्मक और दया याचिका का विकल्प है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धर्मेंद्र राणा ने कहा, मैं समझता हूं कि पवन के कानूनी वकील को भी थोड़ा समय मिलना चाहिए ताकि वह मुवक्किल का प्रभावी प्रतिनिधित्व कर सकें। ताकि दोषी को कानूनी सहायता महज दिखावा या सतही कार्रवाई जैसी नहीं लगे। कोर्ट ने पवन को वकील देने का यह फैसला तब किया, जब उसने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से कानूनी सहायता देने का प्रस्ताव ठुकरा दिया था। कोर्ट ने बुधवार को ही प्रक्रिया में देरी पर भड़कते हुए पवन को एक वकील देने का प्रस्ताव दिया था।
जज ने कहा, संविधान का अनुच्छेद 21 दोषियों का आखिरी सांस तक जीवन और स्वतंत्रता का संरक्षण करता है। मेरे विचार में यह मामला कानूनी अधिकार दोषी के कानूनी विकल्पों के खत्म होने के अधिकार से जुड़ा है और कोर्ट दोषी के मौलिक अधिकारों को नजरअंदाज नहीं कर सकता है।
निर्भया की मां बोली, अगली तारीख फिर उम्मीद के साथ आऊंगी
मुझे कोर्ट पर भरोसा है। मगर जब डेथ वारंट जारी नहीं हुआ तो मैं अगली तारीख पर इसी उम्मीद और भरोसे के साथ फिर आऊंगी। -निर्भया की मां