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निर्भया केस: अलग-अलग फांसी और विनय की याचिका पर आज सुनवाई, पीड़िता की मां बोली- ..फिर आऊंगी

Fri, 14 Feb 2020 06:32 AM IST
योगेश साहू न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने की है यह मांग, दोषी पवन के लिए अंजना प्रकाश को न्याय मित्र बनाया
  • विनय की दया याचिका खारिज होने के खिलाफ अर्जी भी आज ही फैसला
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nirbhaya case - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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निर्भया मामले में दोषियों को अलग-अलग फांसी देने की इजाजत की मांग वाली केंद्र की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट ने चारों गुनहगारों को शुक्रवार दोपहर दो बजे तक जवाब देने का वक्त दिया है। इसके बाद अर्जी पर सुनवाई होगी। वहीं, एक और दोषी विनय शर्मा की दया याचिका खारिज होने की चुनौती देने वाली याचिका पर भी शीर्ष अदालत शुक्रवार को ही फैसला सुनाएगा।

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जस्टिस आर भानुमति, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एएस बोपन्ना की पीठ ने एक और दोषी पवन कुमार गुप्ता के लिए वरिष्ठ वकील अंजना प्रकाश को न्याय मित्र नियुक्त करने का आदेश दिया है। पवन गुप्ता इकलौता दोषी है, जिसने अभी तक सुधारात्मक याचिका नहीं दी है। उसने अभी दया याचिका भी नहीं दायर की है। केंद्र ने अपनी अर्जी में कहा है कि सिर्फ पवन के पास कानूनी विकल्प बचा है, लेकिन इस वजह से बाकी दोषियों की भी फांसी नहीं हो पा रही है।

पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की इस अर्जी पर दोषियों को नोटिस जारी किया था। अब कोर्ट को तय करना है कि क्या दोषियों को अलग-अलग फांसी पर लटकाया जा सकता है। केंद्र का कहना है कि फांसी को टालने के लिए दोषी जिस तरह से कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग कर रहे हैं, उसे जारी रहने देना न्याय के हित में नहीं है।
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विनय की दलील: मैं कानून का छात्र, कांग्रेस कार्यकर्ता भी
विनय शर्मा के वकील एपी सिंह ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दावा किया कि उनके मुवक्किल को जेल में लगातार मानसिक प्रताड़ना दी जा रही थी, इसके अलावा उसे कई तरह की दवाएं भी दी गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत में पहली बार चार युवाओं को फांसी दी जा रही है, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं रहा है। इस पर अदालत ने वकील को फटकार लगाते हुए कहा कि वह कानूनी बिंदुओं पर ही बात करें। तब एपी सिंह ने अदालत से कहा, विनय का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, वह आदतन अपराधी नहीं है। एक खेती करने वाले परिवार से है, कांग्रेस का कार्यकर्ता रहा है।

मेहता ने कहा, राष्ट्रपति के समक्ष सभी स्थिति साफ की गई थी
जस्टिस अशोक भूषण ने एपी सिंह ने कहा कि आप ये सब बताने की बजाय सिर्फ अपनी कानूनी दलीलें रखें। विनय शर्मा की ओर से जब एपी सिंह ने मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया तो सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इसे खारिज करते हुए कहा कि अदालत के फैसले, मेडिकल रिपोर्ट, परिवार की आर्थिक और सामाजिक स्थिति को राष्ट्रपति के सामने रखा गया था। उसी के बाद दया याचिका खारिज हुई है। ऐसे में ये दलील नहीं दी जा सकती है।

दिल्ली कोर्ट ने भी पवन के लिए तय किया वकील, डेथ वारंट की अर्जी पर सुनवाई सोमवार को

इस बीच, दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट ने बृहस्पतिवार को दोषी पवन के लिए रावी काजी को नियुक्त किया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धर्मेंद्र राणा ने यह फैसला तब किया, जब पवन ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से कानूनी सहायता देने का प्रस्ताव ठुकरा दिया। कोर्ट ने बुधवार को ही प्रक्रिया में देरी पर भड़कते हुए पवन को एक वकील देने का प्रस्ताव दिया था। कोर्ट ने इसके साथ ही दोषियों की फांसी के लिए नया डेथ वारंट जारी करने अर्जियों पर सुनवाई सोमवार तक के लिए टाल दी।

दिखावे के लिए नहीं होती कानूनी सहायता: कोर्ट
निर्भया मामले में दिल्ली की पटियाला हाउस अदालत ने बृहस्पतिवार को दोषियों को फांसी देने के लिए नया डेथ वारंट जारी करने की अर्जी पर सुनवाई सोमवार दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी। दिल्ली सरकार और निर्भया के माता-पिता की अर्जी पर की जा रही सुनवाई में कोर्ट ने एक दोषी पवन गुप्ता के लिए एक वकील रवि काजी को नियुक्त कर दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि कानूनी सहायता महज दिखावा के लिए नहीं हो सकती। चारों दोषियों में से सिर्फ पवन के पास ही सुधारात्मक और दया याचिका का विकल्प है।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धर्मेंद्र राणा ने कहा, मैं समझता हूं कि पवन के कानूनी वकील को भी थोड़ा समय मिलना चाहिए ताकि वह मुवक्किल का प्रभावी प्रतिनिधित्व कर सकें। ताकि दोषी को कानूनी सहायता महज दिखावा या सतही कार्रवाई जैसी नहीं लगे। कोर्ट ने पवन को वकील देने का यह फैसला तब किया, जब उसने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से कानूनी सहायता देने का प्रस्ताव ठुकरा दिया था। कोर्ट ने बुधवार को ही प्रक्रिया में देरी पर भड़कते हुए पवन को एक वकील देने का प्रस्ताव दिया था।
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आखिरी सांस तक जीवन का संरक्षण

जज ने कहा, संविधान का अनुच्छेद 21 दोषियों का आखिरी सांस तक जीवन और स्वतंत्रता का संरक्षण करता है। मेरे विचार में यह मामला कानूनी अधिकार दोषी के कानूनी विकल्पों के खत्म होने के अधिकार से जुड़ा है और कोर्ट दोषी के मौलिक अधिकारों को नजरअंदाज नहीं कर सकता है।

निर्भया की मां बोली, अगली तारीख फिर उम्मीद के साथ आऊंगी
मुझे कोर्ट पर भरोसा है। मगर जब डेथ वारंट जारी नहीं हुआ तो मैं अगली तारीख पर इसी उम्मीद और भरोसे के साथ फिर आऊंगी। -निर्भया की मां
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