इस घटना के बाद देश में गुस्सा का बवंडर उठा, जिसका असर कोने-कोने में हुआ। महिला सुरक्षा के लिए कड़े कानून बनाने की मांग की गई, और जस्टिस वर्मा समिति बनी। 2013 के कानूनी संशोधन लागू किए गए। वहीं, किशोर न्याय अधिनियम में 2015 में बदलाव किया गया, हत्या-दुष्कर्म जैसे मामलों में आरोपी को अपराधी मानने की आयु सीमा 18 से घटाकर 16 कर दी गई।
हैदराबाद दुष्कर्म व हत्याकांड के बाद लोगों में गुस्सा बढ़ा, तो निर्भया के दरिंदों को फांसी देने की प्रक्रिया आगे बढ़ी। दिल्ली के सीएम दफ्तर में पड़ी एक दुष्कर्मी की दया याचिका की फाइल गृह मंत्रालय तक पहुंची। मंत्रालय ने माफी खारिज करते हुए राष्ट्रपति को भेज दी।
लेकिन कानूनी दांव-पेच ऐसा कि दुष्कर्मी ने अपनी याचिका होने से ही इनकार कर दिया। इस बीच तंत्र जागा, यूपी से जल्लाद मांगा गया। अब 17 को सुप्रीम कोर्ट में चौथे दुष्कर्मी अक्षय की याचिका पर सुनवाई होगी। अगले दिन निचली अदालत डेथ वारंट की अर्जी पर सुनवाई करेगी।