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'निपाह' वायरस के दस्तक देते ही अलर्ट पर केरल, जानें इसके लक्षण और बचाव के तरीके

Tue, 04 Jun 2019 03:16 PM IST
Nilesh Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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केरल में निपाह वायरस का मामला - फोटो : PTI
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केरल में एक बार फिर निपाह वायरस ने दस्तक दी है। कोच्चि के एक छात्र में निपाह वायरस की पुष्टि के बाद केरल सरकार अलर्ट है। छात्र के संपर्क में आए 86 अन्य लोगों को भी डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है। एक तरफ केरल सरकार ने अस्पतालों में व्यवस्था दुरुस्त कर दी है, वहीं केंद्र सरकार ने भी स्वास्थ्य टीम को केरल भेजा है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्द्धन ने हर संभव मदद करने की बात कही है। 

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पिछले साल केरल में इसी वायरस की चपेट में आने से 17 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि इससे पहले पश्चिम बंगाल के सिलिगुड़ी में 45 और नादिया जिले में पांच लोगों की मौत हो चुकी है। इस वायरस की दस्तक एक बार फिर खतरे की घंटी है। हालांकि केरल सरकार और केंद्र सरकार इससे निबटने के लिए पूरी तरह तैयार है। 

निपाह वायरस क्या है, इसका नामकरण कैसे हुआ, इसके संक्रमण के लक्षण क्या हैं, इससे बचाव के क्या उपाय हैं, ऐसे ही कई सवाल एक बार फिर लोगों के मन में उठ रहे हैं। आइए, जानते हैं इसके बारे में विस्तार से: 

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क्या है निपाह वायरस, कैसे पड़ा नाम?

निपाह वायरस वार्ड - फोटो : PTI
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन(डब्ल्यूएचओ) के अनुसार निपाह तेजी से उभरता वायरस है, जो जानवरों और इंसानों में गंभीर बीमारी को जन्म देता है। 
  • निपाह के बारे में सबसे पहले 1998 में मलेशिया के कम्पंग सुंगाई निपाह गांव से इसका पता चला था। वहीं से इस वायरस को यह नाम मिला। 
  • उस वक्त इस बीमारी के वाहक सुअर बनते थे। इसके बाद जहां-जहां निपाह के बारे में पता चला, इस वायरस को लाने-ले जाने वाले कोई माध्यम नहीं थे। 
  • साल 2004 में बांग्लादेश में कुछ लोग इस वायरस की चपेट में आए।
  • इन लोगों ने खजूर के पेड़ से निकलने वाले तरल को चखा था और इस तरल तक वायरस को लाने वाले चमगादड़ थे, जिन्हें फ्रूट बैट कहा जाता है।

भारत में निपाह वायरस का प्रकोप

(File Photo)
  • भारत में पहली बार टेरोपस गिगेंटस चमगादड़ में इस वायरस का पता चला था।
  • साल 2001 में पश्चिम बंगाल के सिलिगुड़ी में व्यक्ति से व्यक्ति में इसके फैलने का पता चला।
  • सिलिगुड़ी में निपाह वायरस से 66 लोग इसकी चपेट में आए, जबकि 45 लोगों की मौत हो गई।
  • साल 2007 में पश्चिम बंगाल के नादिया में पांच लोग इसकी चपेट में आए और पांचों लोगों की मौत हो गई। 
  • केरल में मई 2018 में 18 लोग इस वायरस की चपेट में आए, जिनमें से 17 लोगों की मौत हो गई।
  • मरने वालों में मरीजों का इलाज करने वाली नर्स भी शामिल थी। 

क्या हैं इस बीमारी के लक्षण

(File Photo)
  • सिर दर्द, तेज बुखार, सुस्ती
  • उलझन, याद्दाश्त कमजोर होना, भ्रम होना 
  • मिर्गी आना और दौरे पड़ना
  • हालत ज्यादा खराब हो तो मरीज कोमा में भी जा सकता है। 
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संक्रमण से बचाव और इलाज

(File Photo)
  • पक्षियों या जानवरों का चखा/खाया/खुरचा हुआ फल न खाएं।
  • उस व्यक्ति के नजदीक न जाएं जो इस वायरस से पीड़ित हो।
  • इस वायरस की वजह से जिनकी मौत हुई हो, उनके शव से भी दूर रहें।
  • पीड़ित व्यक्ति के नजदीक जाना पड़े तो मुंह पर मास्क और हाथों में ग्लब्स पहनें। 
  • अगर तेज बुखार हो तो तुरंत अस्पताल जाएं।
  • इस बीमारी के इलाज के लिए कोई वैक्सीन नहीं है।
  • इस बीमारी के लक्षणों का ही इलाज किया जा सकता है।
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