निपाह वायरस मुख्य रूप से फल खाने वाले चमगादड़ों के ज़रिए फैलता है, भारत में अब तक कई बार प्रकोप का कारण बन चुका है। इसकी मृत्यु दर 50% से अधिक है, जो इसे सबसे खतरनाक वायरल रोगों में से एक बनाता है।
भारत में निपाह वायरस की पहचान अब मिनटों में की जा सकेगी। राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (एनआईवी) ने निपाह वायरस के लिए नई पोर्टेबल पॉइंट-ऑफ-केयर टेस्ट किट तैयार की है। यह टेस्ट लैब के बाहर भी तुरंत नतीजा दे सकता है और इसे खासतौर पर उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों जैसे केरल और पश्चिम बंगाल में जल्द इस्तेमाल किया जाएगा। एनआईवी के निदेशक डॉ. नवीन कुमार ने बताया कि लैंप आधारित पोर्टेबल किट से यह परीक्षण लैब की आवश्यकता के बिना ही कुछ ही मिनटों में परिणाम देता है। यह टेस्ट किट पेटेंट भी की जा चुकी है।
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दरअसल, निपाह वायरस मुख्य रूप से फल खाने वाले चमगादड़ों के ज़रिए फैलता है, भारत में अब तक कई बार प्रकोप का कारण बन चुका है। इसकी मृत्यु दर 50% से अधिक है, जो इसे सबसे खतरनाक वायरल रोगों में से एक बनाता है। जानकारी के मुताबिक, एनआईवी जायडस हेल्थ साइंसेज और ट्रांसलेशनल हेल्थ साइंसेज टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट के साथ निपाह के इलाज के लिए मोनोक्लोनल एंटीबॉडी विकसित करने की दिशा में भी प्रगति की है। यह एंटीबॉडी, शरीर में वायरस के प्रभाव को निष्क्रिय कर सकती है। संस्थान निपाह वायरस के लिए एक स्वदेशी टीका पर भी काम कर रहा है, जो आने वाले वर्षों में परीक्षण के चरण में प्रवेश करेगी।
सिर्फ मलयेशिया और बांग्लादेश-जैसे जेनेटिक वेरिएंट
आंकड़ों के अनुसार, भारत में अब तक जो निपाह वायरस के नमूने मिले हैं, वे ‘जीनोटाइप बी’ श्रेणी के अंतर्गत आते हैं जो बांग्लादेश और भारत में पाए जाते हैं। यह वेरिएंट तेजी से फैलता है और गंभीर लक्षण पैदा करता है, जबकि मलयेशियाई वेरिएंट (जीनोटाइप एम) उसकी तुलना में कम संक्रामक है। पिछले एक दशक में निपाह वायरस के अधिकांश मामले केरल और पश्चिम बंगाल से सामने आए हैं। इन राज्यों में विशेष लैब और निगरानी तंत्र स्थापित किया है। बिहार, असम, मिजोरम और ओडिशा में भी कई मामले मिले हैं।