अधिकारी ने बताया कि हाल ही में प्रसव प्रक्रिया से गुजरने वाली मांएं हाथों से बच्चों को छुपा कर इमारत से भागी और जान बचाई। कांच से बनी इमारत के सामने का हिस्सा मार्ग को बाधित कर रहा था और अंदर जाने में रुकावट पैदा कर रहा था और इस वजह से दमकल कर्मियों को अंदर फंसे हुए लोगों को बचाने के लिए सभी तलों पर लगे कांच तोड़ने पड़े। एमआईडीसी इलाके के उपप्रमुख दमकल अधिकारी मिलिंद ओग्ले ने बताया कि अस्पताल के पास आग लगने से निपटने के तय मापडंदों संबंधी अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं था।
उन्होंने बताया, “अस्पताल ने एक पखवाड़े पहले अपने निर्मानाधीन इमारत के लिए अंतिम एनओसी के लिए आवेदन किया था जो आग की चपेट में आने वाली पुरानी इमारत से सटी हुई है।” ओग्ले ने कहा, “जब हमारी टीम अग्निशमन संबंधी शर्तों के निरीक्षण के लिए गई थी तो उसे कुछ जगहों पर खामियां नजर आईं और इसकी जानकारी अस्पताल प्रशासन को दे दी गई।”
उन्होंने बताया कि नयी इमारत के लिए अनुपालन की शर्तों की समीक्षा करते हुए टीम ने अस्पताल की पुरानी इमारत में भी कुछ कमियों पर गौर किया। ओग्ले ने कहा, “इसलिए हमने पुरानी इमारत के लिए भी पूर्ण एवं अंतिम एनओसी जारी करने से इनकार कर दिया।”
अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर राकेश शर्मा ने बताया कि सबकुछ अचानक हुआ। दमकल विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि यह आग भूतल पर रखे गए रबर के रोल के पास हुए शॉर्ट सर्किट के बाद लगी मालूम होती है। हालांकि इसकी सही वजह जांच के बाद ही पता चलेगी।