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निकाय चुनावः कहीं बैलेट पेपर में निकले नोट तो कहीं ईवीएम से नहीं निकली वोट, रिजल्ट के मजेदार किस्से

Sat, 02 Dec 2017 10:20 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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उत्तर प्रदेश के निकाय चुनावों का पिटारा खुल चुका है, लोकसभा और विधानसभा चुनावों की तरह इस बार भी भाजपा ही इन चुनावों की सिरमौर बनकर सामने आई है। नगर निगम की 16 में से 14 सीटें भाजपा के पाले में आई हैं तो नगर पालिका की 198 में से 70 से ज्यादा सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की है। यही हाल नगर पंचायत का भी रहा जहां भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। शुक्रवार को जब मतगणना शुरू हुई तो ईवीएम से परिणामों के साथ साथ कुछ मजेदार किस्से भी बाहर आए। कहीं बैलेट पेपर के साथ नोट भी बाहर निकले तो कहीं ईवीएम से कोई वोट ही नहीं निकल पाई। कई दिग्‍गजों को अपने गढ़ में ही हार का मुंह देखना पड़ा तो कुछ की एंट्री देखकर सब चौंक गए। आइए आपको बताते हैं कुछ ऐसे ही रोचक किस्सों के बारे में-
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अपने ही गढ़ नहीं बचा पाए भाजपा के दिग्‍गज
चुनावों के दौरान जहां भाजपा ने पूरे प्रदेश में परचम लहराया वहीं दिग्गजों के गढ़ में ही पार्टी को शर्मनाक हार भी देखनी पड़ी। यहां तक की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी अपने वार्ड में पार्टी को जीत दिलाने में सफल नहीं हो सके। गोरखपुर में सीएम योगी के वार्ड 'पुराना गोरखपुर' में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा है। यहां पर निर्दलीय प्रत्याशी शमीम ने जीत दर्ज की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी यहां मतदान किया था। इसके अलावा गोरखनाथ मंदिर के आसपास के चार वार्ड का चुनाव भी भाजपा नहीं जीत सकी।

मुलायम की साली को झेलनी पड़ी हार
औरैया की बिधूना से मुलायम सिंह की साली कल्पना गुप्ता को हार का सामना करना पड़ा है। बिधूना नगर पंचायत से सपा से टिकट न मिलने पर सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव की साली कल्पना गुप्ता ने पार्टी से बगावत कर दी थी। उन्होंने निर्दलीय अपना नामांकन दाखिल करा दिया था। उनके साथ तमाम समर्थक थे। कल्पना गुप्ता ने तब कहा था कि मुलायम सिंह का आशीर्वाद उनके साथ है। इस सीट से नगर पंचायत अध्यक्ष पद पर अमित बाथम (लाल्टू) ने जीत हासिल की है।
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राष्ट्रपति के भतीजे की पत्नी भी नहीं बचा पाई हार

जनपद कानपुर देहात से झिंझक नगर पालिका से राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की भतीजे की पत्नी दीपा कोविंद को भी करारी हार झेलनी पड़ी है। यहां से बसपा की सरोजिनी संखवार ने जीत हासिल कर ली है। भारतीय जनता पार्टी से टिकट नहीं मिलने से नाराज दीपा कोविंद ने निर्दलीय चुनाव लड़ा था। दीपा कोविंद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के भतीजे की पत्नी हैं।

अमेठी में ही हुआ कांग्रेस का सूपडा साफ
निकाय चुनावों में सबसे शर्मनाक हार झेलनी पड़ी कांग्रेस पार्टी को वो भी अपने ही गढ़ में। कांग्रेस ने अमेठी और मुसाफिरखाना नगर पंचायत से अपना प्रत्याशी नहीं उतारा था। पहली बार नगर पालिका परिषद बनी गौरीगंज में गीता सरोज उसकी प्रत्याशी थीं। गीता सरोज पूर्व में सुल्तानपुर की जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुकी हैं। प्रतिष्ठापरक चुनाव में गीता सरोज चार नंबर पर पहुंच गईं। जायस नगर पालिका परिषद से कांग्रेस से इसरत हुसैन मैदान में थे। उन्हें भी पराजय का मुंह देखना पड़ा। 

नवाजुद्दीन सिद्दीकी की भाभी भी हारीं चुनाव
बॉलीवुड अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी की भाभी शबा सिद्दीकी चुनाव हार गई हैं। शबा सिद्दीकी सपा के टिकट पर चुनाव लड़ी थीं। शबा 791 वोट पाकर पांचवें स्थान पर रहीं। भाजपा की बाला त्यागी 8959 वोट लेकर जीतीं। सिद्दीकी ने अपनी भाभी के लिए रोड शो के साथ ही जमकर प्रचार किया था।

ओवैसी की पार्टी ने मारी शानदार एंट्री
फिरोजाबाद नगर निगम के परिणाम आने के बाद लोग अचंभित तब रह गए जब एआईएमआईएम की प्रत्याशी मशरूर फातिमा 56536 वोटों के साथ दूसरे स्‍थान पर रहीं। एआईएमआईएम के लिए ये स्थिति जीत से कम नहीं है।
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बैलेट पेपर्स से निकले दस-दस के नोट

मुरादाबाद जिले के ठाकुरद्वारा मंडी समिति मतगणना सेंटर पर शुक्रवार को बैलेट पेपर्स के बीच दस दस रुपये के नोट नत्‍थी लगे मिले। इन बैलेट पेपर पर भाजपा की मुहर लगी थी, यह मामला सामने आते ही विपक्षी दलों ने हंगामा शुरू कर दिया।

ईवीएम से नहीं निकला एक भी वोट
सहारनपुर में वार्ड 54 से पार्षद निर्दलीय प्रत्याशी शबाना ने ईवीएम में गड़बड़ी होने का आरोप लगाते हुए कहा कि वोट डाले गए, लेकिन रिजल्ट शून्य आया है। उन्होंने ईवीएम पर सवाल उठाए हैं। उनका का कहना है कि परिवार के करीब 300 वोट डाले गए थे, लेकिन रिजल्ट शून्य मिला। शबाना के अनुसार मेरे और मेरे पति का वोट भी मुझे नहीं मिला। कहा- ईवीएम में गड़बड़ी हुई है तभी मुझे एक भी वोट नहीं मिला।

चार शहरों में पहली बार चुने गए मेयर
उत्तर प्रदेश में 16 नगर निकायों के लिए हुए चुनाव में से 4 नगर निगमों में पहली बार वोटरों ने महापौर पद के लिए मतदान किया। इसमें सहारनपुर, मथुरा, फिरोजाबाद और अयोध्या शामिल हैं। इन सभी शहरों में वोटरों ने भाजपा पर ही अपना भरोसा जताया है। सभी पर भाजपा की जीत हुई है।
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